भदोही। ज्ञानपुर के विधायक विजय मिश्र की पहचान अब तक एक सपा नेता के रूप में रही। अपने विधानसभा के साथ जिले की राजनीति में उनका दखल था। विधानसभा चुनाव से पहले टिकट कटने की चर्चाओं के बीच उन्होंने बगावत का झंडा उठाया तो सियासी समीकरण बदलने लगे। भदोही में तो उन्होंने सपा का सूपड़ा साफ किया और पास के जनपदों में भी खासा असर डाला। पिछले दिनों हुए सहस्त्रचंंड़ी महायज्ञ के बाद उनकी पहचान पूर्वांचल के एक बड़े जनाधार वाले ब्राह्मण नेता के रूप में होने लगी है। केन्द्र और प्रदेश की सत्ता में काबिज भाजपा उन पर डोरे डाल रही है लेकिन दूसरे राजनैतिक दल के राजनेता भी उनके यहां अपनी उपस्थिति सिर्फ इस खातिर दर्ज कराने पहुंच रहे हैं कि बड़े वोट बैक की नाराजगी न झेलनी पड़े।

सदन से सड़क तक संघर्ष का तेवर

विजय मिश्र चौथी बार ज्ञानपुर से विधायक चुने गये हैं। बसपा के शासनकाल में वह सीधे मायावती के निशाने पर रहे। बसपा सुप्रीमो ने उनके खिलाफ कई मुकदमे ही नहीं दर्ज कराये बल्कि समर्थकों तक को जेल में डाल दिया। बावजूद इसके अगले चुनाव में वह और अधिक वोटों से जीते। सपा के शासनकाल में पार्टी का विधायक होने के बावजूद सीएम अखिलेश से उनकी नहीं बनी। क्षेत्रीय दल से चुनाव लड़ना लोगों को आत्मघाती कदम लगा लेकिन मजबूत जनाधार का नतीजा था कि जब प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही थी फिर भी भारी वोटों के संग जीत हासिल हुई।

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ब्राह्मण नेता का विकल्प बने

पूर्वांचल में ब्राह्मण नेता की कमी काफी दिनों से महसूस की जा रही थी लेकिन कोई ऐसा नहीं था जिसका आधार कई जिलों तक हो। विजय मिश्र मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले हैं जबकि उनकी पत्नी रामलली मिश्रा सोनभद्र-मीरजापुर की विधान परिषद सदस्य हैं। भदोही उनकी कर्मभूमि हैं। माना जा रहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में उनका दखल सिर्फ भदोही सीट तक नहीं रहेगा बल्कि कई दूसरी सीट पर प्रभाव डाल सकते हैं। सम्भवत: यही कारण था कि चंदौली,जौनपुर, सोनभद्र, मीरजापुर से लेकर दूसरे जनपदों के विधायक उनके कार्यक्रम में न सिर्फ शामिल हुए बल्कि इसका एहसास भी कराया।

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