वाराणसी। जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर इन दिनों नये विवादों में घिरती जा रही है। एक तरफ अपने ‘गॉड फादर’ सरीखे भासपा के विधायक मामा कैलाशनाथ सोनकर के साथ मिल कर भ्रष्टाचार के आरोप तूल पकड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ उसने खुद के ‘कारनामे’ कम नहीं हैं। सूत्रों की माने तो अपराजिता के कदाचार को लेकर कई आरटीआई दायर हुई हैं लेकिन किसी का उत्तर देने की स्थिति में विभाग नहीं है। चर्चाओं के मुताबिक चौतरफा विवादों में घिरने के बाद उन्होंने अपने पुराने दल सपा से एक बार फिर सम्पर्क साधा है। सपा का जिला पंचायत वाराणसी में व्याप्त घोर भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार हल्ला बोल इसी की कड़ी थी। अपना विरोध करने वालों को उन्होंने अरदब में लेने सभी कोशिशों को विफल होते देख विरोधी दल को हथियार बनाते हुए आरोपों की नयी सिरीज जारी करायी है।

सपा से आयी हैं भाजपा में, साफ दिखी नरमी

जिला पंचायत पर धरना वाले सपाइयों की मांग थी कि अपर मुख्य अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर करोड़ो के घोटाले की उच्चस्तरीय जांच करायी जाये। जिलाध्यक्ष डा. पीयूष यादव ने कहा कि जिला पंचायत वाराणसी में अपर मुख्य अधिकारी, अभियंता एवं टैक्स इंस्पेक्टर जेई से लगायत लिपिक तक आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। जिस पर उत्तर प्रदेश कि पदारूढ़ भाजपा सरकार आंख मूंदी हुई है बल्कि ऐसा प्रतीत हो रहा है की सत्तारूढ़ दल के कुछ लोग इन अधिकारियों तथा कर्मचारियों से सांठगांठ करके खुलेआम भ्रष्टाचार करवा रहे हैं। हकीकत यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हासिल करने के लिए अपराजिता ने पहले सपा का सहारा लिया था और सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद अविश्वास प्रस्ताव आने पर भाजपा को जमकर खरी-खोटी सुनायी। प्रस्ताव पारित न होने पर वह रातो-रात भाजपा में शामिल हो गयी लेकिन सपा उन्हें सेल अब भी नरम रुख रखती है। ऐसा लगता है कि उन्हें विश्वास है कि अपराजिता की एक बार फिर ‘घर वापसी’ हो सकती है।

कुर्सी पर आरोप, निशाने पर व्यक्ति

सपा के धरना-प्रदर्शन के दौरान सर्वाधिक निशाने पर एक पद पर पदासीन अधिकारी रहे। खास यह कि उन पर जो आरोप लगाये गये वह पूर्ववर्ती अधिकारी के कार्यकाल के दौरान के थे। दरअसल आरोप भले अधिकारी पर थे लेकिन उस पर असीन का तबादला आठ माह पहले हो चुका है। नये अधिकारी के जमाने में फंड न होने के चलते कुछ काम ही नहीं हो सका। माना जा रहा है कि इस अधिकारी से खुन्नस के चलते अपराजिता कई बार बड़े एलान कर चुकी है। लखनऊ तक गुहार लगायी लेकिन उल्टे अपने खिलाफ आरोपों की पोटली खुलते देख बैकफुट पर आ गयी। आरोप है कि हर दांव बेकार होते देख पुराने सम्पर्को का सहारा फिर से लेना पड़ा।

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