वाराणासी। काशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा तट तक बनाए जा रहे पाथवे को लेकर विरोध तेज हो गया है। निर्माण कार्य के दौरान रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों को तोड़े जाने से नाराज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन जारी है। मंदिर बचाओ अभियान से जुड़े लोग उनके समर्थन में उतरने लगे हैं। सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज लोगों ने मंगलवार को केदारघाट पर जल सत्याग्रह कर गंगा पाथवे का विरोध किया।

12 दिवसीय अनशन पर हैं अविमुक्तेश्वरानंद

मंदिरों में तोड़फोड़ और विग्रह को अपमानित करने सहित कई अन्य मांगों को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद ने जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया है। केदारघाट पर वे 12 दिवसीय अनशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास के नाम पर धर्म से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस बीच उनका आंदोलनअब धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। मंदिर बचाओ समिति से जुड़े लोगों ने जल सत्याग्रह किया। हाथों में तख्ती लिए गंगा में उतरे इन लोगों का कहना था कि विकास के नाम पर काशी के मूल स्वरुप से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिस तरह से मंदिरों को तोड़ा जा रहा है, विग्रह और मन्दिरों को अपमानित किया जा रहा है, उसका अंजाम भयावह होगा।

‘विकास के खिलाफ नहीं है संत समाज’

आंदोलन करने वाले लोगों का कहना था कि काशी का संत समाज विकास के खिलाफ नहीं है। शहर का विकास जरुरी है लेकिन आस्था पर चोट करके नहीं होना चाहिए। उनका विरोध सिर्फ मंदिरों को तोड़ने को लेकर है। हमारी मांग है कि मंदिरों को तोड़े जाने से बचाया जाए, क्योंकि मंदिर ही ही काशी की आत्मा है।

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