सोती रही पिछली कई सरकार, दो फार्मासिस्टों ने दवा खरीद के मामले में करोड़ों किया पार

बलिया। बसपा और सपा के शासनकाल के दौरान फार्मासिस्ट भी कितने प्रभावी थे इसका नमूना शहर कोतवाली में दर्ज मुकदमा है। केंद्रीय औषधि भंडार के चीफ फार्मासिस्ट राम कठिन राम एवं चीफ फार्मासिस्ट सत्य प्रकाश सिंह के विरुद्ध सरकारी धन के गबन और धमकी देने की धाराओं के तहत दर्ज मुकदमे में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप है। पुलिस ने यह कार्रवाई केंद्रीय औषधि भंडार के प्रभारी डाक्टर एके सिंह की तहरीर पर की है। तहरीर में दोनों पर अभिलेख उपलब्ध ना कराना एवं धमकी देने के अलावा चार्ज नहीं देने का आरोप है। खास यह कि दोनों के खिलाफ तीन करोड़ से अधिक की रिकवरी का आदेश भी काफी पहले हो चुका है लेकिन अब तक कार्रवाई अरम्भ नहीं हो सकी है।

घोटाले के खुलासे पर हुआ था तबादला

गौरतलब है कि जिले में दवा खरीद के नाम पर हुए करोड़ों रुपए के घोटाले मामले में निदेशक पैरामेडिकल ज्ञानप्रकाश ने 30 मई को तत्काल प्रभाव से केंद्रीय औषधि भंडार में तैनात आरोपी फार्मासिस्ट सत्य प्रकाश सिंह को ललितपुर तथा राम कठिन राम को चकिया चंदौली स्थानांतरित कर दिया था। साथ ही निर्देश दिया था कि चीफ फार्मासिस्ट सत्य प्रकाश सिंह एवं राम कठिन राम स्थानीय व्यवस्था से कार्यमुक्त होकर नई तैनाती स्थान पर तत्काल पदभार ग्रहण करें और प्रभार प्रमाण पत्र प्रतिहस्ताक्षरित कर संबंधित अधिकारियों व महानिदेशक को यथाशीघ्र उपलब्ध कराई जाए। लेकिन दोनों आरोपी फार्मासिस्टों ने आज तक चार्ज हैंडओवर नहीं किया। जिसकी जानकारी होने पर डीएम भवानी सिंह खागरौत दोनों फार्मासिस्टों के विरुद्ध एफआईआर के लिए 6 जून को सीएमओ को निर्देशित किया था। डीएम के निर्देश के क्रम में सीएमओ ने 7 जून 2018 को एसपी को पत्र लिखकर रपट दर्ज करने की गुहार लगायी थी।

दोनों फार्मासिस्टों से रिकवरी का भी है आदेश

डीजी हेल्थ लखनऊ ने 9 मई 2018 को एडी आजमगढ़ को जांच अधिकारी नियुक्त कर चीफ फार्मासिस्ट राम कठिन राम से वर्ष 2013-14 दवा खरीद में एक करोड दो लाख 23025 रुपए की रिकवरी करने के लिए निर्देशित किया था। इसके पूर्व केंद्रीय औषधि भंडार पर तैनात फार्मासिस्ट सत्य प्रकाश सिंह से भी वर्ष 2003-4 से वर्ष 2005-6 तथा वर्ष 2013-14 में दवा खरीद मे दो करोड 21लाख 94 हजार 394 रुपये गबन का रिकवरी करने का आदेश दिया था।

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