नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में सवा दशक के अधिक पुराने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या के मामले में दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चल रही सुनवाई में इस बार बागपत जेल में एक आरोपित प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या का असर देखने को मिला। दरअसल झांसी जेल से मुन्ना बजरंगी के मारे जाने से संबंधित रिपोर्ट पहले दिन सोमवार को ही आ चुकी थी लिहाजा अगले दो दिनों तक एक गवाही को छोड़ कर मामला कुछ आगे नहीं बढ़ा। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के लिए 10 अगस्त से आगामी तीन दिनों की तिथि नियत की है।

जेल से एक भी आरोपित नहीं पहुंचे

बताया जाता है कि इस बार कोर्ट में मऊ के बाहुबली विधायक समेत जेल में निरुद्ध आरोपित कोर्ट में सुनवाई के लिए नहीं पहुंचे थे। इसे बजरंगी की हत्या का असर समझा जाये या कुछ और लेकिन पूर्व सांसद अफजाल अंसारी और परिवार से जुड़े लोगों को छोड़ किसी ने कोर्ट में आने की हिम्मत नहीं दिखायी थी। पुलिस ही नहीं सीबीआई की कहानी भी मुन्ना बजरंगी के आसपास केन्द्रित थी लिहाजा उसके मारे जाने के बाद दूसरे आरोपित नहीं पहुंचे।

कानूनी दांव-पेंच में फंसा है मामला

भाजपा विधायक को साथियों समेत सात लोगों की हत्या के बाद लंबी कानूनी लड़ाई चली है। पहले तो पुलिस के बदले सीबीआई से जांच को लेकर मशक्कत हुई और इसके बाद प्रदेश के बाहर सुनवाई को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। मोहम्मदाबाद की भाजपा विधायक और स्व. कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय आरोपितों को सजा दिलाने की खातिर कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।

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