वाराणसी। अपराध जगत में कहा जाता था कि नंबर दो के काम में पूरी इमानदारी होती है लेकिन वक्त के साथ बदमाशों के तौर-तरीके बदल रहे हैं। अब तो जेल में बंद रहने वाले बदमाश ‘नामदार’ नहीं हैं तो दूसरे किसी ऐसे के नाम का सहारा ले लेते हैं। यह बात दीगर है कि उन्हें सरपरस्ती शातिर और कुख्यात अपराधियों की मिलती रहती है। यह चौंकाने वाला खुलासा क्राइम ब्रांच ने भाजपा के पांच पार्षदों को फोन कर धमकाने के मामले में किया है। इस मामले में सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की मदद से शनिवार को दो बदमाशों को गिरफ्तार के बाद पूछताछ के बाद गुत्थियां सुलझती गयी। एसएसपी आरके भारद्वाज ने मीडिया के सामने गिरफ्तार आरोपित अमित कुमार व राहुल कुमार को पेश करते हुए बताया कि इस मामले के आरोपितों के खिलाफ रासुका के तहत भी कार्रवाई की जायेगी।

सर्विलांस से मिले थे अहम सुराग

गौरतलब है कि 30 मई से दो जून के बीच भाजपा के पांच पार्षदों को काल कर आजमगढ़ जेल में निरुद्ध एजाज अंसारी के नाम से धमकाया गया था। इसमें से दो पार्षदों के पास बदमाश खुद जाकर अपने मोबाइल से बात कराए थे जबकि शेष तीन पार्षदों के पास काल आई थी। एसएसपी ने मामले की गंभीरता देखते हुए इसकी जांच क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह को सौंपी थी। जांच में स्पष्ट हुअ कि धमकी देने वाला गाजीपुर जेल में निरुद्ध चोलापुर का रवींद्र पटेल उर्फ राजू है और अपने गुर्गों की मदद इसमें ली है। गिरफ्तार अमित ने कबूल किया कि उसके गांव के रवींद्र ने कहा था कि रंगदारी के मामलों में शिकायत कम होती है जबकि धन काफी आता है। उसके चढाने पर हम लोगों ने नगर निगम पार्षदों और बड़ी दुकानों में काम करने वाले मित्रों से उनके मालिकों का नंबर लिये। इसके बाद आयर निवासी विनोद यादव के साथ दो पार्षदों के पास जाकर मोबाइल से रवींद्र की बात कराई। पांचों पार्षदों से जो रंगदारी मिलती उसमें से दो-दो लाख अमित, राहुल और विनोद को मिलता। खास यह कि विनोद को दो दिन पहले ही कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

गिरफ्तारी और बरामदगी में एसआई राकेश सिंह, कांस्टेबल कुलदीप सिंह, सुमंत सिंह, रामभवन यादव, विवेकमणि त्रिपाठी, चंद्रसेन सिंह, सुरेंद्र मौर्या, पुनदेव सिंह व सुनील राय की टीम को एसएसपी ने 10 हजार रुपये का नगद इनाम दिया।

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