पूर्व सांसद के जेल से निकलने के नहीं आसार, कथित ‘हलफनामे’ पर ठोंक रहे थे ‘खम’ लेकिन कोर्ट में पेशी के समय रहे ‘सन्न’

जौनपुर। पिछले कई दिनों से कई खुद को अधिवक्ता बताने वाले तो कई पैरोकार पूरे जोश के साथ प्रचार कर रहे थे कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमें के ‘दम’ नहीं रह गया है। वजह, मुकदमे के वादी ने कोर्ट में हलफनामा दे दिया है कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और पुलिस ने जबरन रपट दर्ज करा ली। निगाहे टिकी थी जमानत याचिका की सुनवाई पर। बुधवार को लाइन बाजार थाना क्षेत्र में अपहरण व रंगदारी के मामले में एडीजे (प्रथम) मनोज कुमार ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपित पूर्व सांसद धनंजय सिंह की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। इससे साफ हो गया कि धनंजय की जेल की सलाखों के पीछे से रिहाई के कोई आसार दूर दराज तक नहीं हैं और ताजा घटनाक्रम से ‘करीबी’ भी कन्नी काटने लगे हैं।

रंगदारी की खातिर प्रोजेक्ट मैनेजर हुआ था अगवा!

वादी प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंहल ने रपट दर्ज करायी थी कि पूर्व सांसद के कहने पर आरोपित विक्रम व अन्य ने जबरन अपहरण किया तथा पूर्व सांसद के घर ले गए। यहां सांसद काली पिस्टल लेकर आए और जबरन वादी की फर्म को कम गुणवत्ता वाली सामग्री की आपूर्ति करने को कहा। इन्कार करने पर भद्दी गालियां व धमकी दी तथा रंगदारी मांगी। घटना की एफआइआर 10 मई को लाइन बाजार थाने में दर्ज हुई। देर रात ही बाहुबली सांसद की गिरफ्तारी हुई। दूसरे दिन कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। मजिस्ट्रेट कोर्ट से जमानत अर्जी निरस्त होने के बाद सेशन कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दिया गया जहां कोर्ट ने बुधवार को जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

टूटने लगा है भरोसा

अब तक तो पूर्व सांसद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा से लेकर सूबे के सीएम योगी से करीबी रिश्ता बताते हुए सहयोगियों को भ्रम में रखते थे। वास्तविक्ता यह भी कि पूरा जोर लगाने पर भी भाजपा तो छोड़िये सहयोगी दलों में इंट्री नहीं मिल सकी। तीसरी पत्नी को हैदराबाद में भाजपा में शामिल कराया लेकिन अब तक भ्रम में समर्थको को रखने में सफल रहे। कभी मुन्ना बजरंगी प्रकरण तो कभी किसान नेता से रंगदारी वसूलने के मामले में सीबीआई से लेकर थाने के रोजनामचे में नाम आता रहा लेकिन ताजा प्रकरण जेल की सलाखों के पीछे भेजने भर पर्याप्त रहा।

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