वाराणसी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या परिवार के गले के नीचे नहीं उतर रही है। उनका साफ आरोप है कि इस मामले में शासन के संग पुलिस-प्रशासन की संलिप्तता रही है। मणिकर्णिका घाट पर मंगलवार को अंतिम संस्कार के दौरान भाई राजेश सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान मामले में सीएम योगी से लेकर प्रतिद्वंदी गिरोह के एमएलसी बृजेश सिंह, पूर्व सांसद धनंजय सिंह की संलिप्तता बतायी। भावना के आवेश में आकर राजेश ने सवा दशक पहले बजरंगी की गोली का शिकार बने कृष्णानंद राय का भी नाम लिया लेकिन बाद में सुधारते हुए उनकी विधायक पत्नी अलका राय को दोषी बताया। केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के बारे में टिप्पणी थी कि वह तो मामले के ‘गवाह’ ही हैं। स्पष्ट शब्दों में इसे सरकारी हत्याकांड करार दिया।

सीबीआई जांच से कम कुछ मंजूर नहीं

राजेश का कहना था कि जिस तरह समूचे मामले में सरकार की संलिप्तता दिख रही है इससे पुलिस समेत दूसरी किसी एजेंसी पर भरोसा नहीं है। मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिये और इससे कम कुछ मंजूर नहीं है। परिवार इसके लिए कानूनी रास्ता अपनायेगा। भाभी सीमा ने पहले ही प्रेस कांफे्रस कर इसकी आशंका जता दी थी और अंतत: वह सच साबित हुई। यह कोई गैंगवार नहीं है बल्कि सरकार के इशारे पर हुई वारदात है।

पिस्टल होती तो पता लग जाती औकात

मामले के आरोपित सुनील राठी के बजरंगी के पास पिस्टल होने और उसे छीन कर आत्मरक्षार्थ फायरिंग के दावों का माखौल उडाते हुए दावा किया कि मेरा भाई शेर था। उसके पास यदि पिस्टल होती तो सभी को अकेले मार गिराता। जेल दाखिले के समय तलाशी ली गयी थी तो पिस्टल बजरंगी के पास कैसे पहुंच जाती? राजेश का कहना था कि जेल की दीवारों के पीछे कायरों की तरह मारा गया। हिम्मत होती तो बाहर निकाल कर एनकाउंटर करने कोशिश करते तब भी समझ में आ जाता।

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