वाराणसी। रोहितनगर (लंका) में सैकड़ों की संख्या में शिवलिंग और विग्रह मिलने की जानकारी कुछ ‘खास’ लोगों को होती है। सोशल मीडिया के जरिये इसे वायरल ही नहीं किया जाता बल्कि भीड़ जुटा कर पूजा-पाठ शुरू हो जाती है। दावा कि मलवा श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर से निकला है। खास यह कि जिन शिवलिंग और दूसरे सामान सैकड़ों साल पुराने बताये जाते हैं उनकी कभी पूजा तक नहीं हुई दिखती थी। समूचे घटनाक्रम को शासन से गंभीरता से लिया है। सूत्रों की माने तो इस मामले में कुछ सुराग मिले हैं जिसके आधार पर संदिग्ध चिह्नित ही नहीं हुए बल्कि कुछ को ठा कर पूछताछ शुरू हो चुकी है। मोर्चा कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने खुद संभाल लिया है और डीएम सुरेन्द्र सिंह को मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिये हैं। इसके अलावा एसएसपी आनंद कुलकर्णी को विवेचना कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने को कहा है।

विरोध जिनका एजेंडा, फैला रहे अफवाह

दरअसल पीएम मोदी का कार्यक्रम तय होने के बाद सुनियोजित तरीके से घटनाक्रम हुआ है। कमिश्नर की माने तो उस दुकान का भी पता चल चुका है जहां से यह शिवलिंग लाकर खाली प्लाट में प्लांट किये गये थे। इस बड़ी साजिश के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी गोपनीय ढंग से जांच कराई जा रही है। कमिश्नर का मानना है कुछ लोग लगातार काशी विश्वनाथ कॉरीडोर रोकने की खातिर हर हद पार कर चुके हैं। इस में रुकावट डालने के लिए वह अफवाह न सिर्फ फैला रहे हैं बल्कि अब साजिशें रच रहे हैं।

मलवा तो वहां जाता ही नहीं!

आरम्भिक जांच में स्पष्ट हो चुका है कि प्लाट में जो शिवलिंग मिले हैं न सिर्फ नये हैं बल्कि एक ही तरह के पत्थरों से निर्माण किया गया है। पिछले कई महीनों से कॉरिडोर से निकलने वाला मलवा सरकारी कर्मचारियों की निगरानी में राजघाट पर फेंका जाता है। ऐसे में शहर के दूसरे छोर पर इनका पहुंचना ही सवालों के घेरे में है। इस मामले में आईपीसी की धाराओं के अलावा सख्त निरोधात्मक कार्रवाई की जायेगी जिसमें रासुका तक शामिल है। काशी का माहौल खराब करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा। कहना न होगा कि इससे पहले भी पीएम के कार्यक्रम के पहले बीएचयू की छात्राओं के बीच बाहरियों ने विरोध-प्रदर्शन को ऐसा रूप दे दिया था कि दौरे से अधिक मीडिया में इसकी चर्चा रही थी।

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