वाराणसी। संदहां गांव (चौबेपुर) में शनिवार की देर रात बचनू जायसवाल (75) को बदमाशों ने सिर कूंचकर मौत के घाट उतार दिया। आशंका जतायी जा रही है कि हत्यारों ने देर रात गेटपर बुलाने के बाद अचानक हमला कर दिया। जान बचाने के लिए गेट से पीछे अपनी चहारदिवारी की तरफ लेकिन लगभग 10 मीटर दूर गिर पड़े। हमलावरों को भरोसा हो गया कि मौत हो चुकी है तो वह आराम से फरार हो गये। रोजाना की तरह सुबह 7 बजे दूध देने वाला बिनोद यादव जब दूध पहुंचा तो गेट से कुछ दूरी पर औंधे मुंह पडे और खून से लथपथ पडा शव देख शोर मचाने लगा। गांववालों ने परिजनों को सूचना दी। मौके पर दोनों पुत्र महेश जायसवाल और मनोज जायसवाल आये तब तक एसओ ओमनारायण सिह, सीओ पिन्डरा सुरेन्द्रनाथ और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंच कर जाँच शुरू कर चुके थे। पुलिस की कुतिया कई बार घर के पीछे जाकर लौट रही थी। पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है। शराब कारोबारी बेटे महेश जायसवाल की तहरीर पर सन्दहां निवासी रामपूजन जायसवाल व सोयेपुर थाना कैंट निवासी रामजतन राजभर के अलावा 5 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस कारणों का पता कर रही है। इसके अलावा पुलिस सोयेपुर व गांव की रंजिश को भी खगाल रही है

रूटीन से परिचित थे हमलावर

बताया जाता है कि हाइवे निर्माण के दौरान बचनू के घर का कुछ हिस्सा गिर गया था। दो पुत्र पांच पुत्रियों के पिता बचनू का पूरा परिवार पहडिया में रहता है। वह दिन में अपने बेटों के यहां पहड़िया चले जाते थे लेकिन रात को दे्खभाल करने की खातिर चले आते थे। इस रूटीन की जानकारी हमलावरों को थी। अक्सर खाकर लौटते थे लेकिन कभी पड़ोस में भी कमरे के पीछे से खिड़की से खाना मंगा कर खा लेते थे। शनिवार को बड़े पुत्र मनोज जायसवाल के यहा सारंग तालाब से लौटे थे। छोटा भाई व शराब का लाइसेंसी महेश कुछ दूर पहड़िया के पास रहते है। वारदात की जानकारी मिलते ही मौके पर सूबे के स्वतन्त्र प्रभार राज्यमंत्री अनिल राजभर भी पहुंच कर घटना की निंदा कर एसओ को निर्देश दिया कि मामले का खुलासा अति शीघ्र करे। मंत्री ने रोते बिलखते परिवार को ढांढस बंधायी।

पहले भी हो चुका था जानलेवा हमला

बचनू जायसवाल के उपर लगभग तीन दशक पहले भी एक बार जानलेवा हमला हुआ था। हमलावरों ने सिर पर गोली मारी थी। संयोग था कि गोली जबड़े पर लगी जिससे उनकी जान बच गयी लेकिन निशान जीवन के अंत तक बने थे। पुत्र महेश जायसवाल ने बताया बाउंड्री के अंदर दो कुत्ते रहते थे। दोनों का आस पास में आतंक था और लोग डरते थे। वारदात के समय कुत्तों का न भूंकना चौंकाने वाला है। माना जा रहा है कि कुत्ते हमलावर से परिचित थे इसी के चलते नहीं भूंके।

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