लॉकडाउन का असर या समाज को प्रेरित करने की पहल, बौद्ध धर्म अनुसार हुई शादी जिसमें महज 10 थे बाराती

वाराणसी। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के फैसले संक्रमण का असर सामाजिक ताने-बाने पर दिखने लगा है। ग्रामीण इलाकों में होने वाले वैवाहिक समारोह जहां धूमधाम से होते थे वहां अब सादगी ही नहीं बल्कि संक्रमण से बचाव की तैयारी दिख रही है। ऐसा ही कुछ सेवापुरी ब्लाक की ग्राम पंचायत रामेश्वर की दलित बस्ती में देखने को मिला। यहां पर महज 10 बारातियों की उपस्थिति में लाक डाउन के नियमो का पालन करते हुए बौद्ध धर्म के रीति रिवाज से पूजा भारती उम्र 25 की शादी सुरेरी जौनपुर सूरज 26 वर्ष के संग सम्पन्न हुई। बारात सुरेरी जौनपुर से दोपहर रामेश्वर आई थी जहां विवाह स्थल पर सेनिटीजिंग कर बुद्ध व अम्बेडकर जी का फोटो लगाया गया था। बारातियों को सेनिटाइजर देकर साफ सफाई किया गया। दो घण्टे में शादी सम्पन्न हुई। औपचारिक रूप से मंगल गीत गाये गए।

पहले से तय था विवाह

कन्या के पिता सुरेंद्र राम होमगार्ड सिपाही माता संगीता आंगनबाड़ी सहायिका हैं। दोनों की ही पुत्री को उच्च शिक्षा एम ए समाजशास्त्र, बीटीसी,सीटेट दिलाकर सरकारी सेवा शिक्षा विभाग में भेजने की प्रबल इच्छा है उसे पूरा करने का दायित्व निभाएंगे। शादी पहले से ही तय होने और बिना दहेज के एक छोटे शादी समारोह में करने का तमन्ना पूरा हुआ। लॉक डाउन के बाद गौने के अवसर पर धूमधाम से सगे सम्बधियों को शामिल कर उत्सव का शौक भी पूरा करेंगे। दो बेटों पंकज व परमेश भारती की शादी भी बिना दहेज का करके एक सन्देश देंगे कि बेटा-बेटी एक समान बेटा बिकाऊ नही बेटा कमाऊ होगा। विदाई के समय सभी के हाथों को सेनिटीजिंग करते हुए मास्क,गमच्छा व हैंडवाश दिया गया।

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