चंदौली। प्रदेश में नक्सली गतिविधियों को आरम्भ करने का श्रेय नौगढ़ निवासी देवनाखथ कोल और लालब्रत कोल को जाता है। लाखों के इनामी रहे इन नक्सलियों ने कई वारदातों को अंजाम दिया लेकिन पुलिस आपसी विवाद बता कर इसे दबाने की कोशिश करती रही। नौगढ के तत्कालीन एसओ ओपी सिंह और सिपाही की हत्या के बाद जो नाम सर्वाधिक चर्चा में रहा वह बासमती कोल का था। नक्सलियों के आतंक का नतीजा या कुछ और था कि बासमती कोल नौगढ़ की ब्लाक प्रमुख चुनी गयी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने बासमती को अपनी पुत्री बताते हुए उसे राज्य महिला आयोग का सदस्य बनाया था। सपा में मुलायम का वर्चस्व समाप्त होने के बाद बासमती राज्यमंत्री दर्जा से झोपड़ी में लौट आयी। गुरुवार की रात शराब पीने के विवाद में साथी ने ही लाठी से पीट-पीट कर बासमती को मौत की नींद सुला दिया।

पुलिस ने यूं सुलझायी हत्या की गुत्थी

नौगढ़ ब्लाक की पूर्व प्रमुख बासमती कोल की खून से लथपथ लाश मिलने की सूचना पर पुलिस के होश उड़ गये थे। एसपी संतोष सिंह ने अधीनस्थों को मौके पर भेजने के साथ खुद मानीटरिंग शुरू की। पता चला कि गुरुवार की शाम 4 बजे बासमती अपने करीबी काशीनाथ संग तेंदुआ गांव के समीप सिंधारघाट मलरहवा जंगल में झोपड़ी के बाहर दिखी थी। यहां कई अन्य लोग भी शराब पी रहे थे। इसी दौरान किसी बात पर विवाद होने पर बासमती ने काशीनाथ को कई हाथ जड़ दिए। विवाद बढ़ा लेकिन नशा कम होने पर मान मनौव्वल के बाद दोनों रात करीब आठ बजे सो गए। पुलिस ने पकड़ा तो काशीनाथ ने कबूल किया कि रात में फिर विवाद होने पर उसने बासमती की पिटाई कर दी थी। इसके बाद दोनों सो गए थे। भोर में चार बजे नींद खुलने पर उसने बासमती के शरीर पर खून लगा देखा। इस पर उसने 108 नंबर के एंबुलेंस से बासमती को नौगढ़ अस्पताल पहुंचाया। यहां डा. अमरनाथ ने चकिया भेज दिया जहां डाक्टरों ने बासमती को मृत घोषित कर दिया। एसपी के मुताबिक पूर्व प्रमुख बासमती कोल की हत्या के आरोपी काशीनाथ कोल को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। उसने प्रमुख की हत्या करना कबूल किया है।

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