बलिया। निर्भया के संग गैंग रेप और हत्या मामले में अभियुक्तों की फाँसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी है। इनकी पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। फैसले से निर्भया के दादा लालजी सिंह बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि इन लोगों को फांसी जल्द होनी चाहिए। कानूनी प्रक्रिया बहुत धीरे चल रही है। हमारी बूढ़ी आंखों के सामने ही इन लोगों की फांसी की सजा होती तो अच्छा होता। मैं जीते जी इन लोगों को फांसी पर चढ़ते देखना चाहता हूं जिससे निर्भया के आत्मा को शांति मिले और हमारे दिल को सुकून मिले। जिससे फिर कभी कोई ऐसी समाज में दरिंदगी ना हो और घटना दोहराई ना जाए कानून इतना विलंब कर रहा है जिससे अपराधियों के मन में खौफ पैदा नहीं हो रहा है और उनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं कानून को चाहिए कि जल्द से जल्द ऐसे अपराधियों को फांसी पर झूला देना चाहिए। उस समय का इंतजार कर रहा हूं जब निर्भया के अपराधियों को फांसी पर लटकाया जाएगा इन अपराधियों को अभी तक कानून ने क्यों बचाया है यदि मेरे मरने के बाद इन लोगों को फांसी की सजा दी जाएगी तो मुझे क्या मालूम हुआ कि क्या हुआ और मेरी आत्मा हमेशा बेचैन रहेगी ।

तीन ने दायर की थी पुनर्विचार याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को पवन, विनय और मुकेश की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था जबकि चौथे दोषी अक्षय ने पुनर्विचार याचिका दाखिल नही की थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 को निर्भया केस में चारों दोषी मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को दिल्ली हाइकोर्ट द्वारा दी गयी फांसी की सजा को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये मामला रेयरेस्ट आॅफ रेयर की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा था कि पीड़िता ने मरने से पहले जो बयान दिया वह बेहद अहम और पुख्ता साक्ष्य हैं। इस मामले ने देश भर में सदमें की सुनामी ला दी थी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी जिसके बाद इन दोषियो ने एक-एक कर रिव्यू पिटिशन दाखिल की। नियम के तहत रिव्यू पिटिशन की ओपन कोर्ट में सुनवाई हुई और सुनवाई के बाद 4 मई 2018 को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट में फैसले के बाद निर्भया के घरवालों ने कहा कि उन्हें इंसाफ की पूरी उम्मीद थी और चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी इन्हें फांसी पर लटकाया जाय।

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