नई दिल्ली। गुजरात के सीएम के रूप में नरेन्द्र मोदी की अलग छवि थी। बावजूद इसके देश के दूसरे स्थानों पर होने वाले चुनावो में भाजपा उनका इस्तेमाल कम करती थी। उन दिनों भाजपा केन्द्र की सत्ता से दूर थी लेकिन चुनाव में दिल्ली के कुुछ नेता ही डिमांड में रहते थे। मोदी के पीएम बनने के उनकी ब्रांड बन गयी और देश में इसके बाद होने वाले चुनावों में उनके उपर पार्टी की निर्धरता रही। पिछले एक साल में परिदृश्य बदलने लगा है। मोदी के बाद दूसरे ब्रांड के रूप में यूपी के सीएम योगी उभर रहे हैं। चुनाव में जहां मोदी की सभा संभव नहीं रहती वहां एक ही मांग रहती है कि योगी को भेज दे। योगी मैजिक का कमाल त्रिपुरा के चुनाव में दिका था और कर्नाटक में उन्होंने इसे बरकरार रखा। उन जगहों पर जहां योगी की रैली हुई वहां की जीत का ग्राफ पीएम से कम नहीं रहा है।

फायर ब्रांड नेता, संत की है छवि

योगी गोरक्षधाम के पीठाधीश्वर है जो नाथ संप्रदाय का है। शैव पंथ का यह सम्प्रदाय जाति प्रथा का धुर विरोधी होने के साथ हिन्दुओं में सुधारवादी दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। मोदी की तर्ज पर परिवान न होने वाली छवि योगी के लिए अलग नजरिया बनाती है। धार्मिक गुरू होने के नाते उनका मठों से पुराना संबंध है। कर्नाटक में भाजपा के लिए तटीय इलाका सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण था जहां पर कमान योगी को सौंपी गयी थी। उन्होंने हुबली, धारवाड़, उत्तर कन्नड, बेलगाम तथा बिदर के इलाकों में चुनावी सभाओं से परिदृश्य बदल दिया। अंतिम दिनों में तो सीएम सिद्धरमैया ने भांप लिया था कि मोदी का मुकाबला हो सकता है लेकिन योगी का नहीं। इसी के चलते उन्होंने चुनाव को उत्तर-दक्षिण की लड़ाई मं बदलने की कोशिश की। इसके काट में योगी ने खुद को राम के इलाके का कह कर हनुमान का साथ मांगते हुए पलटवार किया तो कांग्रेस के पांव उखड़ गये।

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