वाराणसी। जम्मू-कश्मीर की सत्ता में चार साल रहने के बाद भाजपा ने महबूबा सरकार से समर्थन वापस लेने का जो फैसला लिया उस पर अपना पक्ष जनता के सामने रखने की खातिर पार्टी ने हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है। दरअसल गृह मंत्री राजनाथ सिंह के सीजफायर के निर्णय और इस दौरान बड़ी संख्या में जवानों की शहादत की चौतरफा आलोचना हुई थी। साख बचाने की खातिर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ हुई दिल्ली में कोर ग्रुप की बैठक के बाद यह निर्णय लेने के साथ नेताओं को स्थिति स्पष्ट करने की हिदायत दी गयी थी।

राष्ट नीति राजनीति से उपर

बलिया के सांसद भरत सिंह ने कहा कि पीएम मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तथा जम्मू-कश्मीर के प्रभारी राममाधव द्वारा जम्मू कश्मीर में पीडीपी सरकार से समर्थन वापस लेना एक ऐतिहासिक निर्णय है। भारत लोकतांत्रिक राष्ट्रीय है और यह फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है। सांसद ने कहा कि राष्ट्रनीति तो राजनीति से सदैव ऊपर है। आतंकियों के खिलाफ महबूबा मुफ्ती की कमजोर नीति की वजह से पार्टी ने पीडीपी से समर्थन वापस लिया। सुरक्षा,शांति और विकास भाजपा की प्राथमिकता में है। महबूबा सरकार से समर्थन वापस लेकर भाजपा ने जम्मू कश्मीर को अलगाववादी, जेहादी व इस्लामिक आतंकवाद से मुक्ति दिलाया है। राष्ट्रीय एकता-अखण्डता, शांति एवं सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया यह निर्णय दलीय हित से उपर लिया गया है।

जनता की सुरक्षा के संग ढिलाई नहीं

काशी पहुंचे डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि भाजपा और एनडीए का एक उद्देश्य है जनता की सुरक्षा के साथ ढिलाई नहीं बरतना। आतंकवाद पर भाजपा की सख्त नीति रही है। कश्मीर में भाजपा का गठबंधन टूटा नहीं है बल्कि भाजपा ने देशहित में समर्थन वापस लिया है। तुष्टीकरण की निति को छोड़ विपक्षी दलों को भी आतंकियों को लेकर अपना नजरिया स्पष्ट करना चाहिये।

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