विनीत को लेकर सोशल मीडिया में चल रहा ‘हल्ला’ हो सकता है ‘हकीकत’, चुकता करने को हिसाब मिलेगा दिग्गजों का ‘साथ’

वाराणसी। पूर्व एमएलसी श्याम नारायण उर्फ विनीत सिंह को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गयी है। चंदौली से उनके मैदान में उतरने की आहट के साथ भाजपा के होश फाख्ता हो गये हैं। अब तक के समीकरणों के अनुसार सीट पूरी तरह से आसान दिख रही थी लेकिन लेकिन विनीत सरीखे जमीनी नेता के आने पर पासा पलट भी सकता है। दरअसल गठबंधन की तरफ से जिसे प्रत्याशी घोषित किया गया उसके नाम की घोषणा के साथ विरोध का सिलसिला आरम्भ हो गया जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। उधर सपा-बसपा ही नहीं बल्कि भाजपा का एक बड़ा खेमा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर खासा नाराज चल रहा है। सूत्रों की माने तो कई दिग्गज पर्दे के पीछे से अपना हिसाब चुकता करने की खातिर विनीत को समर्थन दे सकते हैं। चर्चाओं को बल इस खातिर भी मिला कि विनीत की तरफ से नामांकन के लिए पर्चा खरीदा गया है।

गठबंधन के दोनों खेमों में नाराजगी

गठबंधन के तहत सीट सपा के कोटे में थी जिसे लेकर कई लोगों ने काफी समय से तैयारियां शुरू कर दी थी। इस बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था कि बसपा के बड़े नेता को सपा के टिकट पर मैदान में उतारा जायेगा। अखिलेश यादव ने यहां से ‘पैराशूट प्रत्याशी’ के रूप में चर्चित डा. संजय चौहान को टिकट दिया है उसे लेकर दोनों ही दल के नेता से लेकर कार्यकर्ता खुल कर विरोध में उतर आये हैं। समूचे क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला आरम्भ हो चुका है। बड़े नेता सामने नहीं आ रहे हैं लेकिन पर्दे के पीछे से उनका पूरा समर्थन प्रदर्शनकारियों को है। ऐसे में दोनों के कोर वोट बैंक के खिसकने का खतरा बढ़ गया है।

तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी बाहरी

गौरतलब है कि चंदौली में इस बार सभी प्रमुख दलों ने जिन्हें टिकट दिया है उनमें एक बी स्थानीय नहीं है। भाजपा प्रत्याशी डा. महेन्द्रनाथ पाण्डेय मूल रूप से गाजीपुर के रहने वाले हैं और चंदौली से पहले भदोही में चुनाव लड़ चुके हैं। सपा-बसपा गठबंधन की तरफ से मैदान में उतरे संजय चौहान भी गाजीपुर के रहने वाले हैं और चंदौली से कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा था। कांग्रेस गठबंधन की प्रत्याशी शिवकन्या भी बुंदेलखंड क्षेत्र की रहने वाली है। कोई भी स्थानीय प्रत्याशी न होने के नाते उनकी टीम भी बाहरी है जिससे कार्यकर्ता नाखुश हंै। विनीत स्थानीय होने के साथ लंबे समय से बसपा से जुड़े रहे हैं जिससे हर गांव में उनका नेटवर्क पहले से मौजूद है।

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