लखनऊ। झांसी जेल में निरुद्ध माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी कहे जाने वाले ठेकेदार मोहम्मद तारिक की हत्या के बाद उसकी पत्नी बन कर सामने आयी ताहिरा नाज उर्फ नेहा श्रीवास्वत पुलिस के लिए बड़ी मिस्ट्री बनी है। हत्या से पहले घरवालों तक को उसके बारे में जानकारी नहीं थी। दूसरी तरफ पुलिस को जानकारी मिली है कि पांच साल पहले प्रापर्टी डीलर और गिट्टी-बालू कारोबारी अभय सिंह की हत्या के मामले में पति नित्यानंद के संग जेल जा चुकी नेहा श्रीवास्तव ही ताहिरा के रूप में तारिक के साथ रह रही थी। हलांकि ताहिरा ने खुद को नित्यानंद की पत्नी नेहा मानने से इनकार कर दिया है। अलबत्ता उसने स्वीकार किया है कि वह बजरंगी से काफी समयसे परिचित है। ताहिरा ने खुद को बनारस का बताया है जिस पर बनारस पुलिस के सम्पर्क कर उसके परिजनों की तलाश की जा रही है। बनारस कनेक्शन से हत्या के मामले में सुराग मिलने की उम्मीद में पुलिस ने शनिवार की देर रात तक ताहिरा से पूछताछ भी की थी।

जुमे को असलहा हाथ नहीं लगाता था तारिक!

बदमाशों का गोली का शिकार बने ठेकेदार तारिक का शव पोस्टमार्टम के बाद लखनऊ ले लेकर परिजन शनिवार की रात पहुंचे। पीलीकोठी के मोती झील तकिया पर सुपुर्द-ए-खाक के समय बड़ी संख्या में परिचित और मित्र जुटे थे। इन लोगों का कहना था कि तारिक धार्मिक प्रवृत्ति का था और जुमे को असलहे को हाथ तक नहीं लगाता था। यह बाद बदमाशों को बतायी गयी थी। बदमाशों के घेरे जाने के बाद तारिक ने दूर तक एसयूवी को बैक कर भागने की अंतिम कोशिश की थी लेकिन डिवाइडर से टकराने के बाद दोनों तरफ से फायरिंग होने लगी। हत्यारों ने 9 एमएम की पिस्टल से गोलियां बरसायी थी। दांयी तरफ से हाथ में तीन गोली थी लेकिन सीने पर लगी बुलेट जानलेवा साबित हुई। दूसरी तरफ बांयी तरफ से किया फायर कूल्हे पर लगा था।

शक के दायरे में पूर्वांचल के शूटर्स

मूल रूप से विशेश्वरगंज (कोतवाली) निवासी तरिक की हत्या भले लखनऊ में की गयी हो लेकिन पुलिस को शक है इसे अंजाम देने वाले शूटर्स पूर्वांचल के ही है। इनमें से कई ऐसों पर भी शक जताया जा रहा है जो पहले बजरंगी से जुड़े थे और किन्ही कारणों से अलग हो गये। तारिक का बढ़ता कद पूर्वांचल के पहले से स्थापित कई माफिया को सुहा नहीं रहा था लेकिन खुल कर विरोध करने की स्थिति में न होने के चलते वह दूसरों को हवा दे रहे थे। सरकारी ठेकों में तारिक नेअच्छी पकड़ बना ली थी और सपा की सरकार में एक मंत्री के करीबियों को चुनौती देते हुए टेंडर डाला था।

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