वाराणसी। माफिया मुन्ना बजरंगी के लेफ्टीनेंट माने जाने वाले मोहम्मद तारिक की हत्या की गुत्थी उलझती जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैंगवार के साथ गैंग में वार के पहलू को भी टटोला जा रहा है। इसकी अहम वजह तारिक का बजरंगी का सबसे खास होना गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों की आंखों में भी खटकना बताया जा रहा है। इससे पहले बजरंगी के नाम पर मोटी रकम वसूल ली जाती थी और उसे पता तक नहीं चलता था। किसी भी मामले में ‘आका’ का नाम सुनने के बाद तरिक इसकी रिपोर्ट पहुंचा देता था जिससे बहुतों की दुकान बंद सी हो गयी थी। बताया जाता है कि बजरंगी ने इस वारदात के बाद झांसी लोगों में सबसे मुलाकात बंद कर दी है। बहुत ही खास लोगों को मुलाकात की इजाजत दी रही है और शेष को लौटा दिया जा रहा है।

तारिक पर बढ़ती जा रही थी निर्भरता

तारिक सिर्फ मुन्ना बजरंगी के व्यावसायिक काम ही नहीं देखता था बल्कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पत्नी सीमा सिंह के चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभायी थी। मुन्ना बजरंगी की निर्भरता तारिक पर बढ़ती जा रही थी। कभी गिरोह का अहम हिस्सा रह चुके लोगों को यह कत्तई नहीं सुहा रहा था। इन लोगों को मुन्ना का किसी काम के लिए संदेश मिलता तो उसे पूरा करने में कई दिन लग जाते लेकिन तारिक सब कुछ छोड़कर निर्देशों को पूरा करता। गिरोह का साथ छोड़ चुके कुछ शार्प शूटरों को तारिक के बारे में सब कुछ पता था। माना जा रहा है कि विरोधियों ने इसका लाभ उठाया और मुन्ना के लेफ्टीनेंट को उसी के शूटरों का निशाना बनवा दिया।

वरुणापार में बढी सरगर्मी

नगर निकाय चुनाव में तारिक ने बजरंगी से जुड़े कुछ पार्षद प्रत्याशियों की जीत के लिए खासी मशक्कत भी की थी। इनमें से कुछ को जीत मिली जबकि कुछ को हार का सामना करना पड़ा। कई की जीत को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाते हुए तारिक ने फोन भी कराये थे। तारिक हत्या के पहले वाराणसी आया था तो उसने इसे लेकर नाराजगी जतायी थी। सूत्रों की माने तो वरुणापार की एक कालोनी में पार्टी का आयोजन किया गया था जहां इस मुद्दे पर सफाई दी गयी थी। खास यह कि वरुणापार इलाके में तारिक की हत्या के बाद सरगर्मी बढ़ गयी है। अगले ‘मैनेजर’ का दावा करने वालों ने लक्जरी वाहनों के काफिले और सुरक्षाकर्मियों के घेरे में निकल कर यह एहसास कराने की कोशिश की हत्या का असर नहीं पड़ा है।

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