वाराणसी। दहेज प्रताड़ना का मामलों में प्राय: जिनकी मामले में कोई भूमिका नहीं रहती उन्हें भी नामजद कर दिया जाता है। विवेचक नाम निकालने के एवज में मोटी रकम वसूलते हैं। कुछ ऐसे ही महिला थाने की दरोगा गीता यादव ने भी सोचा था लेकिन उन्हें आभास नहीं था कि शिकायत उपर तक पहुंच चुकी है। नतीजा, भरलाई (शिवपुर) में टीसी अभिषेक पाठक के घर रिश्वत की दूसरी किश्त के रूप में 20 हजार रुपये लेने पहुंची गीता को मंगलवार की शम ऐन्टी करप्शन की टीम ने रंगेहाथ धर-दबोचा। अभिषेक का कहना है कि विवेचना कर रही दरोगा ने बंगलोर में रहने वाली बहन जिसका मामले से कोई लेना-देना नहीं, का नाम निकालने के एवज में एक लाख की मांग की थी। पहले 30 हजार ले चुकी दरोगा शेष रकम के लिए दबाव बना रही थी। आजिज आकर इसकी शिकायक एंटी करेप्शन से की और दूसरी किश्त लेने आने की जानकारी दे दी। गीता यादव के ऊपर शिवपुर थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियंम के तहत मुकदमा दर्ज कर उनको हवालात दाखिल करा दिया गया।
पत्नी ने छह माह पहले दर्ज कराया था मुकदमा
शिकायतकर्ता अभिषेक पाठक वाराणसी कैंट में टीसी पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्नी पूजा चौबे ने उनके तथा सास गीता पाठक व ननद रचना तिवारी के खिलाफ 27 जून 2017 को कोतवाली महिला थाने में आईपीसी की धारा 498,323अ,504,506,313 व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियंम का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की विवेचना एसआई गीता यादव कर रही थी। अभिषेक ने बताया कि मेरी पत्नी ने फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया है। सौदेबाजी के बाद गीता ने बहन रचना तिवारी का नाम जो कि बंगलोर में रहती है उसका नाम और कुछ धारा हटाने के लिए धन की मांग की थी।
रंगेहाथ पकड़ाने पर अनूठी सफाई
वही गीता यादव ने रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद गिरफ्तार करने वाली एंटी करप्सन टीम के ऊपर आरोप मढ़ दिये। उनका कहना था कि एंटी करप्सन की टीम ने हमको वहां बुलाकर जबरन मेरे हाथ मे पैसा रखकर हाथ धुलवाया। आरोपों को एंटी करप्सन की टीम ने झूठा करार दिया है। गिरफ्तार करने वाली टीम में इंस्पेक्टर श्रीमती सरोज पांडेय,प्रेम शंकर दुबे, गोबिंदबल्लभ जोशी,कांस्टेबिल ओमप्रकाश यादव,नरेंद्र कुमार सिंह, राजकुमार पाल,सुनील कुमार यादव, व पुनीत कुमार सिंह शामिल थे।

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