वाराणसी। अन्नपूर्णा मंदिर वैसे तो साल भर खुला रहता है लेकिन साल में चार दिन स्वर्णमयी रूप का दर्शन होता है। धनतेरस के दिन से आरम्भ हुए दर्शन के आखिरी दिन अन्नकूट के दिन 56 छप्पन भोग लगता है। परम्परा के अनुसार गुरुवार की दोपहर मां की भोग आरती के बाद प्रसाद अन्नकूट प्रसाद मिलने लगा जो कि देर शाम तक भक्तो ने हजारो कि संख्या मे प्रसाद ग्रहण किया। महंत रामेश्वपुरी ने कहा कि अन्नकूट प्रसाद खाने से शरीर के सब रोग दूर हो जाते है अपितु किसी प्रकार का कोई समस्या नही होती पूरे भारत वर्ष से लोग इस प्रसाद को खाने के लिए पहुचते है। अंतिम दिन है रात्रि 11 बजे माँ की महाआरती कर पट बन्द हो जायेगा। फिर अगले वर्ष स्वर्णमयी मां का दर्शन मिलेगा ।

पुख्ता प्रबंधों के चलते नहीं हुई अव्यवस्था

अन्नकूट महोत्सव की खातिर अन्नपूर्णा मंदिर में पूरे परिसर को तरह तरह की मिठाइयों से सजाया गया था। कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिये जिला प्रशासन द्वारा पहले दिन से ही भारी संख्या में फोर्स तैनात की जाती है। इसके अलावा प्रबंध की तरफ से भी मन्दिर प्रांगण में अतिरिक्त कैमरे लगाये गये थे। साथ ही परिषर में चिकित्सक की टीम भी मौजूद रही। पुख्ता प्रबंधों का नतीजा रहा कि लाखों की संख्या में आने के बावजूद भक्तो को किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई और सभी को दर्शन सुलभ मिले। रेडजोन में अन्य मंदिरों में भी अन्नकूट पर्व मनाया गया।

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