वाराणसी। यूनेस्को ने ऋगवेद सबसे प्राचीनतम ग्रन्थ माना है और मानवता का प्रथम ग्रन्थ माना है। वेद मानव मात्र के कल्याण का सबसे बड़ा ग्रन्थ है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र और धार्मिक व सांस्कृतिक नगरी काशी में विश्व वेद सम्मेलन की खातिर लोगों को जोड़ने पहुंचे स्वामी अग्निवेश का कहना है कि इसके जरिये गलत व्याख्यो व संकीर्ण सोच को स्पष्ट करना जिससे वेदों की सही व्याख्या स्थापित किया जा सके। उनका मानना है कि जातिवाद मिटाना है और शराब व मांसाहार को समाप्त करना है तो वेदों की ओर लौटना होगा। यही नहीं समाज की तमाम विषमताओ को मिटाने हेतु वेदों के अलावा कोई जरिया नहीं है। जगतगंज स्थित होटल में मीडिया से बातचीत में स्वामी अग्निवेश ने बताया कि विश्व वेद सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति से और समापन उपराष्ट्रपति करेंगे।
विश्व के कई हिस्सों से आ रहे हैं प्रतिनिधि
स्वामी अग्निवेश ने 15 से 17 दिसम्बर तक दिल्ली में होने वाले विश्व वेद दिवस के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि 1968 से वह शराब बंदी के लिए संघर्ष कर रहे है। सम्मेलन में विश्व के विभिन्न भागो से लोग एकत्रित हो रहे है जिसमे वेदों के तमाम विद्वान भी भाग लेंगे। इससे पहले 8 से 10 नवम्बर तक सोनीपत में एक अधिवेशन होने जा रहा है जिसमे विश्व सरकार की संकल्पना को साकार करने के लिए किया जा रहा है। साथ ही इसमे सयुंक्त राष्ट्र संघ को और मजबूत बनाते हुये इसे विश्व सरकार की संकल्पना को दिशा देना है। विश्व वेद सम्मेलन का उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा इससे संकीर्णता को समाप्त करना है और यह मानवता के उत्थान का प्रथम संविधान है। वेदों की सटीक व्याख्या पर चर्चा के संग एक ईश्वर, एक सृष्टि, एक मानव की परिकल्पना को सिद्ध करना है। वेदों में लिखित टिकाये स्वत: प्रमाणित हैं।
आजमगढ़ के सम्मेलन में डेढ़ लाख लोग भाग लेंगे
स्वामी अग्निवेश जी ने दावा किया कि इब्राहिमपुर (आजमगढ़) में हिन्दू मुस्लिम एकता व शराब बंदी कार्यक्रम में वह भागीदारी करेंगे जहां डेढ़ लाख लोग एकत्रित होंगे। कार्यक्रम में मानवाधिकार कार्यकर्ता डा. लेनिन रघुवंशी, यश भारती अवार्डी पंडित विकास महाराज, ज्योतिषाचार्य मृतुन्जय त्रिपाठी और सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित प्रभास महाराज भी मौजूद थे।

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