वाराणसी। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के सात दिवसीय प्रवास के दौरान भाजपाई दरवाजे के बाहर रोके जा सकते हैं। दरअसल कार्यक्रम में उनकी शिरकत को लेकर सस्पेंस बरकरार है। कार्यक्रम में इंट्री उन्हीं को मिलनी है जिनका पहले से रजिस्ट्रेशन हो चुका है। अलबत्ता भाजपाइयों के साथ बैठक हो सकती है लेकिन इस पर भी फैसला संघ प्रमुख के आने के बाद ही होगा। आरएसएस सूत्रों का कहना है कि नेताओं के सामिल होने को लेकर जो भी कयास लगाये जा रहे हैं उनका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं हैं। संघ प्रमुख गुरुवार को पहुंच रहे हैं जिसे लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है।

आंतरिक व्यवस्था में पुलिस का भी हस्तक्षेप नहीं

केन्द्र और प्रदेश में सरकार होने के साथ पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में होने वाले इस कार्यक्रम पर लोगों की निगाहें टिकी है। संघ के 8 राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी भी पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस बाहर तक की व्यवस्था तक सीमित रहेगी। आंतरिक व्यवस्था पूरी तरह से आरएसएस के हाथ में है जिसमें किसी का दखल नहींं चलेगा। सांस्कृतिक संकुल में 18 को कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत के पहले संघ प्रमुख 17 को शास्त्रार्थशाला का उद्घाटन करेंगे।

एक वेश में दिखेंगे सभी

संघ से जुड़े भले वीवीआईपी ही क्यों न हो सभी को नियत गणवेश में ही आना है। रूटीन के तौर पर जो नेता या ‘बड़े लोग’ ब्रांडेड कपड़ों में दिखते हैं वह भी इसी भेष में दिखेंगे। राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों के आने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।

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