लखनऊ। मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी लंबे समय तक जनपद की जेल में रहे हैं। उनसे जुड़ेÞ एक दो नहीं बल्कि सैकड़ो लोग सलाखों के पीछे निरुद्ध है। इसके अलावा माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का परिवार और दूसरे ‘करीबी’ भी यहीं रहते हैं। ऐसे में बजरंगी के हत्यारोपित सुनील राठी का बागपत से लखनऊ जेल शिफ्ट किया जाना सवालों के दायरे में है। वह भी तब जब हत्या के बाद एलानिया तौर पर ‘बदला’ और हर हाल में इंतकाम सरीखे दावे अंत्येष्ठि तक किये गये थे। दबी जुबान से कहा जा रहा है कि सुनील राठी को अब चारा बना कर पेश किया जा रहा है जिससे उसे खत्म कर दूसरा गुट भी संतुष्ट हो जाये। खास यह कि समूचे गोरखधंधे से कारागार महकमे को अनभीज्ञ रखा गया। सूत्रों की माने तो विरोधियो ने अपने सम्पर्को का सहारा लेते हुए समूचे मामले का प्लानिंग रची। केन्द्र में बाहुबली विधायक हैं जिनका बजरंगी करीबी था।
चेहरा बचाने या छिपाने की कवायद
सुनील राठी पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों तक सीमित है और इधर उसके खिलाफ कोई मामला भी नहीं है। बजरंगी हत्याकांड के बाद वह गिरोह के निशाने पर है और पेशी से लेकर जेल के भीतर तक मारने का चैलेंज कई दिनों से दिया जा रहा है। विपक्षी दल घटनाक्रम को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि चेहरा बचाने या मामले को रफा-दफा करने की खातिर यह निर्णय लिया गया है।
दूरस्थ जेल की थी सिफारिश
सूत्रों की माने को जेल महकमे की तरफ से सुनील राठी को उत्तराखंड की सीमा से सटे जेल में शिफ्ट करने की सिफारिश की गयी थी। आला अफसरों ने इसे दरकिनार करते हुए उसे लखनऊ में रखने का हुक्म फरमाया। कहा तो यहां तक जा रहा है कि राठी को मुख्तार के गुर्गों के जरिये खत्म करा कर समूचे मामले को रफा-दफा करने की स्क्रिप्ट लिखी गयी। एक सनसनीखेज वारदात के बाद उसकी पुनरावृत्ति के लिए जेल महकमा तैयार नहीं था लेकिन उस पर दबाव डालने के साथ की गयी सिफारिश को दरकिनार कर दिया गया।

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