लखनऊ। फतेहगढ़ सेंट्रल जेल (फरुर्खाबाद) में बंदियों के दो गुटों के बीच बवाल और स्थिति नियंत्रित करने के दौरान जेल अधिकारी और बंदीरक्षकों के जख्मी होने की खबरों को शासन ने गंभीरता से लिया है। इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गयी है। दरअसल तीन दिन पहले जेल में एक कैदी के खुदकशी करने की अफवाह से माहौल गरमाया था। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी के हत्यारोपित सुुनील राठी के यहां लाये जाने के बाद से बाहर से आने वाली खाद्य सामग्री व अन्य सामान पर रोक को लेकर भी बंदी पहले से आक्रोशित थे। चेकिंग के दौरान मोबाइल से जुड़ी एसेसरीज बरामद होने के रोष चरम पर था जिसका नतीजा रहा कि सुनियजित तरीके से फैलायी अफवाह बवाल का सबब बन गयी। इस दौरान जेल गेट पर तैनात पीएसी के जवान स्थिति से निबटने के लिए हेलमेट और जैकेट आदि पहन कर तैयार थे लेकिन जेल के भीतर मामला दबा लिया गया। मीडिया रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए रिपोर्ट मांगी गयी है।

तलाशी से शुरू हुआ था विवाद

जेल के वरिष्ठ अधीक्षक का कार्यभार देख रहे डीआईजी वीपी त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि बुधवार शाम जेल में तलाशी कराई गई थी। बैरक नंबर एक में निरुद्ध घाटमपुर (कानपुर देहात) निवासी कैदी छोटे शुक्ला उर्फ रूप किशोर ने तलाशी के दौरान बंदीरक्षक पर हमला करने की कोशिश उस समय की जब उसके पास से कुछ प्रतिबंधित सामान मिले। छोटे को दूसरी बैरक में शिफ्ट कर दिया गया। गुरुवार शाम अचानक किसी ने छोटे के फांसी पर लटकने की अफवाह फैला दी। पहले से लामबंद बंदियों के गुटों में आरोप प्रत्यारोप के संग मारपीट होने लगी जो पथराव में तब्दील हो गयी। मामला शांत कराने को अफसरों ने छोटे शुक्ला को दूसरी बैरक से लाकर बंदियों को दिखाया तब शांति हुई। जेल सूत्रों की माने तो अधिकारियोंसे लेकर कर्मचारियों मे भी गुटबाजी चल रही है।

वीडियो कांफ्रेसिंग से सुनील की पेशी

शासन ने सुनील राठी की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिये हैं लेकिन जेल की स्थिति ठीक नहीं चल रही है। अलबत्ता उसे पेशी पर ले जाने के बजाय वीडियो कांफ्रेसिंग से काम चलाया जा रहा है। सुुरक्षा के नाम पर उसका खाना तक जेल में रोका गया था लेकिन पांच दिनों की भूख हड़ताल के बाद जेल प्रशासन इस पर ध्यान देने लगा है।

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