चंदौली। अमूमन किसी अपराधी की फरारी संबंधित जिले या थाने की खातिर सिरदर्द रहती है लेकिन गुरुवार को 20 हजार के इनामी करन गुप्ता उर्फ सिन्टू के पकड़े जाने पर जेलकर्मियों ने राहत की सांस ली। वजह, सिन्टू पहली सितंबर को उदय प्रताप उर्फ खुड्बुड़ के नाम पर पेशीपर गया और वहां से फरार हो गया। एसपी चन्दौली संतोष सिंह ने इस मामले में पेशी कराने वाले पुलिसकर्मियों के संग जेलकर्मियों की संलिप्तता मानते हुए मुकदमा कायम कराया था। इंस्पेक्टर चन्दौली अश्वनी चतुर्वेदी व स्वाट प्रभारी शिवानन्द मिश्रा की टीम ने छापेमारी के दौरान रोडवेज कैंट से सिन्टू को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया के सामने सिन्टू को पेश करते हुए एसपी ने बताया कि कोर्ट से फरार घोषित होने के बाद 20 हजार का पुरस्कार घोषित किया गया था।

फूलप्रूफ योजना बनायी थी

भेलूपुर थाने से पास्को के मामले में गिरफ्तार सिन्टू जिला जेल चौकाघाट में निरुद्ध था। बैरक में रहने वाले अपहरण के आरोपित उदय प्रताप उर्फ खुड्बुड़ निवासी संघती से उसने मित्रता की। पहली सितंबर को पेशी उदय प्रताप उर्फ खुड्बुड़ की थी लेकिन उसके कपडे पहन कर सिन्टू चला गया। कोर्ट में पेश्ी के दौरान उसने फर्जी हस्ताक्षर भी बनाये। वापसी में हाथ झटक कर वह फरार होने में सफल रहा। हिरासत से भागने के बाद वह कानपुर में रह रहा था। वह साथी का हाल जानने के लिए आया था लेकिन सटीक सूचना पर धर दबोचा गया।

पकड़े जाने के बाद भी बरगलाता रहा

सिन्टू इतना शातिर है कि पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी बरगलाता रहा। वह खुद को सिन्टू की जगह उसका भाई बताता रहा। सिन्टू की आगरा में मौजूदगी और उसे गिरफ्तार कराने की पेशकश भी की। एक बार तो पुलिस भी चकमे में फंस जाती लेकिन कड़ाई करने पर वह टूट गया। बैरक में निरुद्ध 10 दूसरे बंदियों के सही नाम बताने पर पुलिस को विश्वास हो गया कि यही असली अपराधी है।

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