छात्र गुटों के बीच काफी दिनों से चल रहा था शह-मात का खेल, पुलिस के संग बीएचयू प्रशासन भांपने में रहा फेल

वाराणसी। बीएचयू के छात्र गौरव सिंह की हत्या के मामले में लंका पुलिस ने गुरुवार को दो आरोपित मंगलम सिंह और आशुतोष पांडेय का चालान कर कर दिया। दोनों को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश् करने के बाद जेल भेज दिया गया। अब तक की जांच और पूछताछ में जो जानकारी सामने आयी है वह चौंकाने वाली है। दोनों गुट पहले साथ थे लेकिन वर्चस्व और वसूली के फेर में रंजिश बढ़ती गी। सरस्वती पूजा के समय हुए विवाद ने आग में घी का काम किया था। चीफ प्राक्टर को आरोपितों में शामिल करने के पीछे की कहानी भी कम चौंकाने वाली नहीं है। गौरव गुट को लगता था कि वह दूसरे पक्ष की मदद कर रही है। सूत्रों की माने तो मामला यहीं तक नहीं था बल्कि गौरव गुट ने भी एक वारदात को अंजाम दिला कर विरोधियों फांसने की योजना तैयार की थी जिसकी भनक मिलने के बाद उसे ही मौत की नींद सुला दिया गया।

बिहार से आये थे शूटर, इंतजाम था बराबर

मंगलवार की शाम बिडला हास्टल के बाहर गोली का निशाना बने गौरव की मौत के बाद 11 लोगों को आरोपित बनाया गया था। वारदात को अंजाम देने के लिए दो बाइक पर छह लोग आये थे। बाइक चोरी की थी जिसे इसी खातिर खरीदा गया था जबकि शूटर बिहार से बुलाये गये थे। इनके ठहरने से लेकर पिस्टल तक का इंतजाम उस युवक ने किया था तो पहले से जेल में बंद है। जेल भेजे गये दोनों छात्र मौका ए वारदात पर मौजूद थे और समूचे घटनाक्रम पर नजर रखे थे। हत्या करने वाले बीएचयू के छात्र नहीं हैं लेकिन उनका पता चल चुका है और तलाश के लिए टीम रवाना की गयी है।

लगातार हो रही वारदात को किया नदरंदाज

गौरव का नाम पहले भी बीएचयू में हुए बवाल में आया था। उसके खिलाफ कई मुकदमे भी दर्ज हुए थे। पिता के बीएचयूकर्मी होने और पास के गांव का रहनेवाला होने के नाते उनकी हनक बाहर से आकर पढ़ने वाले छात्रों से अधिक थी। मंगलम सिंह ने कबूल किया सरस्वती पूजा के पहले से गौरव से मनमुटाव चल रहा था। इस पर विवाद के बाद अगले दिन गौरव के भाई ने हमारे हास्टल में घुसकर फायरिंग की। बीच-बचाव करने पर हमारी पिटाई करने के बाद उल्टे फर्जी मुकदमे में फंसा दिया। पुलिस और बीएचयू प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया और एक बार फिर से वह वारदात कराने की साजिश रच रहा था।

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