253 करोड़ की लागत से नवनिर्मित शहर का स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम होगा क्रियाशील: डा. नीलकंठ तिवारी

वाराणसी। पिछले दिनों भारी बरसात के कारण शहर में हुए जलजमाव को गंभीरता से लेते हुए ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त कराए जाने हेतु मंगलवार को अपने कैंप कार्यालय प्रदेश के विधि -न्याय, युवा कल्याण, खेल एवं सूचना राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी एक्शन मोड में दिखे। उन्होंने में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अभियंता अशोक बर्मन को वाराणसी में 253 करोड़ की लागत से वर्ष 2009 में शुरू करा कर वर्ष 2015 में पूरा कराए गए स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम के मानचित्र सहित तलब किया। उन्होंने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अभियंता से सवाल किया कि 253 करोड़ की भारी-भरकम धनराशि व्यय होने के बावजूद आखिर यहां बरसात के दौरान सड़कों पर जलजमाव कैसे हो रहा है और सीवर से बरसात के पानी क्यों पूरे रफतार एवं क्षमता से नहीं निकल पा रहे हैं।

कमिश्नर को दिये यह निर्देश

राज्यमंत्री ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल को फोन कर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, लोक निर्माण विभाग एवं नगर निगम के अधिकारियों के साथ आगामी दो-तीन दिन के अंदर बैठक कर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम बनाए जाने के दौरान बनाए गए कैकपिट एवं जालियों जिनको सड़क निर्माण के दौरान लोक निर्माण विभाग एवं नगर निगम द्वारा कथित तौर पर बंद कर दिए गए हैं को खुलवाए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराए जाने को कहा। ताकि जलजमाव के कारण नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और शहर का स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम क्रियाशील हो सके। राज्यमंत्री को गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अभियंता द्वारा बताया गया कि शहर के स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम के कार्य को 253 करोड़ की लागत से वर्ष 2009 में शुरू करके वर्ष 2015 में पूरा कराया गया। लेकिन नगर निगम को इसे अभी तक हैंडओवर नहीं किया जा सका है। इसका कारण पूछने पर बताया गया कि ड्रेनेज सिस्टम का जगह-जगह बनाए गए कैकपिट और जालियों को लोक निर्माण विभाग एवं नगर निगम द्वारा सड़क बनाए जाने के दौरान पाट दिया गया हैं। जिस कारण स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह क्रियाशील नहीं हो सका और इसी कारण अब तक इसका हैंडओवर भी नहीं हुआ।

खारिज किया गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का डीपीआर

राज्यमंत्री को यह भी बताया गया कि पाटे एवं बंद जालियों एवं कैकपिट को खुलवाए जाने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा 3 करोड़ रुपए का डीपीआर तैयार किया गया है। मंत्री ने तीन करोड़ रुपए के डीपीआर को सिरे से खारिज करते हुए कमिश्नर से इस संबंध में फोन पर वार्ता कर कहां गया कि वे गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अभियंताओं के साथ लोक निर्माण विभाग एवं नगर निगम के अधिकारियों कि आगामी दो-तीन दिन के अंदर संयुक्त बैठक कर पाटे एवं बंद किए गए कैकपिट एवं जालियों को खुलवाए जाने की व्यवस्था संबंधित विभागों के माध्यम से कराएं। जिससे स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह क्रियाशील हो सके और उसमें सीवर का जल बहाव सुनिश्चित हो। इसके साथ ही उन्होंने कमिश्नर को ड्रेनेज सिस्टम को क्रियाशील होने की दशा में संबंधित विभाग को हैंडओवर कराए जाने की भी व्यवस्था कराए जाने को कहा। ताकि ड्रेनेज सिस्टम का पूरी तरह रखरखाव सुनिश्चित हो सके और शहर के जनता- जनार्दन को जलजमाव की समस्या से पूरी तरह निजात मिल सके।

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