वाराणसी। पर्यावरण को लेकर जागरूकता कुछ वर्षों में बढ़ी है लेकिन ज्योतिष शास्त्र इसके लिए सदैव तत्पर रहा है। एक ज्योतिषी को नक्षत्र-वृक्षों व धार्मिक वृक्षों का ज्ञान रहता है। एक कुशल कर्मकाण्डी पुरोहित को यज्ञीय-वृक्षों व समिधाओं का ज्ञान रहता है, लेकिन चौथी शताब्दी मे हुए ज्योतिष के प्रसिद्ध आचार्य वराहमिहिर का वृक्ष ज्ञान इन सबसे अधिक विस्तृत एवं विलक्षण था। इस बारे में आचार्य वराह मिहिर ने ज्योतिष के सर्वांगीण पहलुओं पर विस्तार से अध्ययन व अध्यापन किया है. उनके द्वारा संहिता शास्त्र पर लिखी गई ‘बृहत्संहिता’ उनकी सर्वोत्तम रचना है। वराहमिहिर वनस्पति शास्त्र के ज्ञाता ही नहीं थे बल्कि उनका मानना था कि सभी प्रकार के जंगली वृक्ष, लताएं, पुष्प, वनौषधि एवं यज्ञीय वनस्पति जगत का विषय है। मनुस्मृति के अनुसार जिनके पुष्प नहीं लगते: किन्तु फल लगते हैं उन्हें ‘वनस्पति’ कहते हैं जैसे पीपल और बिल्ववृक्ष। आयुर्वेद ग्रन्थ ‘भाव प्रकाश’ के अनुसार नन्दीवृक्ष, अश्वत्थ, प्ररोह, गजपादप, स्थालीवृक्ष, क्षयतरू और क्षीरीवृक्ष वनस्पति की श्रेणी में आते है। परन्तु मेदनी कोष के अनुसार पृथ्वी पर उत्पन्न वृक्षमात्र वनस्पति की श्रेणी में आते है।

रोपण से लेकर रक्षा के बताये थे तरीके

बीएचयू ज्योतिष विभाग के शोध छात्र पं गणेश प्रसाद मिश्र के मुताबिक वृक्षायुवेर्दाध्याय के प्रारम्भ में ही वराहमिहिर कहते हैं कि वापी, कूप, तालाब आदि जलाशयों के किनारे पर बगीचा लगाना चाहिए क्योंकि जलयुक्त स्थल यदि छायारहित हो तो शोभा नहीं पाता। बगीचे की स्थापना हेतु कोमल भूमि अच्छी होती है। जिस भूमि में बगीचा (बहुत सारे वृक्ष) लगाना हो उसमें पहले तिल बोवें, जब वे तिल फूल जायें, तब उनको उसी भूमि में मर्दन कर दे। यह भूमि का प्रथम संस्कार है। सबसे पहले बगीचें में या घर के समीप चाहर दिवारी में अशोक, पुन्नाग, शिरीष, प्रियंगु (कुकुनी) के वृक्ष लगाने चाहिएं। वराहमिहिर के अनुसार ये सभी अरिष्टनाशक एवं मंगल फलदायक वृक्ष है। विभिन्न प्रकार के वृक्षों को लगानें के काल व ऋतु का निर्धारण करते हुये वराहमिहिर कहते हैं कि अजातशाखा अर्थात कलमी से भिन्न वृक्षों को शिशिर ऋतु (माघ-फाल्गुण) में, कलमी वृक्षों को वर्षा ऋतु (श्रावण-भाद्रपद) में लगावें। तीनों उत्तरा (उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद), रोहिणी, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, मूल, विशाखा, पुष्य, श्रवण, अश्विनी और हस्त ये नक्षत्र दिव्यदृष्टि वाले मुनियों ने वृक्ष रोपने के लिये श्रेष्ठ कहे है।

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