वाराणसी। बागपत जेल में गोलियों का निशाना बने माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के बाद गिरोह की कमान कौन संभालेगा इसे लेकर चर्चाएं तो कई दिनों से चल रही है लेकिन कोई ऐसा चेहरा अब तक सामने नहीं आ सका है। वजह, बजरंगी का स्थान लेना किसी के लिए सहज नहीं हैं क्योंकि दशकों की फरारी और दर्जनों सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर वह इस स्थान पर पहुंचा था। पिछले एक दशक में भले ही बजरंगी ने किसी वड़ी वारदात को अंजाम न दिया हो और उसके करीबी एक के बाद एक कर गोलियों का निशाना बनते रहे हो लेकिन उसका खौफ पहले की तरह बरकरार था। अपराध जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि मजबूत लेफ्टीनेंट न होने की वजह से बजरंगी गुट का भी श्रीप्रकाश शुक्ल गिरोह सरीखा अंजाम हो सकता है। एक समय प्रदेश में सिर्फ श्रीप्रकाश का नाम चलता था लेकिन उसके मारे जाने के बाद पूरा गिरोह ही खत्म हो गया।

कई प्रदेशों तक फैला रखा था नेटवर्क

सुरेरी (जौनपुर) के पूरे दयाल का निवासी प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी अधिक पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन दो किश्तो में ढाई दशक तक फरारी काटने के चलते वह देश के विभिन्न प्रदेशों में ही नहीं रहा बल्कि वहां वारदातों को अंजाम देकर अपना नेटवर्क तैयार किया। बजरंगी को एसटीएफ ने मुठभेड़ के दौरान मार ही डाला था लेकिन जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर वह उठा तो भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की ही नहीं बल्कि दूसरी बड़ी वारदातों में उसकी संलिप्तता सामने आयी। महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा,पंजाब, उत्तराखंड से लेकर बिहार और झारखंड तक उसने नेटवर्क फैला रखा था। बजरंगी की विरासत को लेकर जिनके भी नाम को लेकर कयास लगाये जा रहे हैं उनका न तो इतना बड़ा नेटवर्क है न ही लंबी फरारी काटने की कूबत।

नहीं रास आयी कारोबारी की छवि

बजरंगी की पहचान एक खूंखार और हर कीमत पर अपने दुश्मन से बदला लेने वाले माफिया डॉन की थी। इस बार मुंबई से गिरफ्तारी के बाद बजरंगी का दूसरा रूप देखने को मिला था। वह डॉन के बदले कारोबारी छवि में अधिक दिखा। राजनीति में प्रवेश की इच्छा या ‘मैनेजरों’ का सलाह का नतीजा था कि साले पुष्पजीत उर्फ पीजे से लेकर तारिक तक की हत्या हो गयी लेकिन बजरंगी की तरफ से पलटवार नहंी हुआ। इसी का नतीजा रहा कि करीबियों के बाद खुद डॉन का खात्मा हो गया। छन कर आने वाली खबरों के मुताबिक गिरोह से जुड़े अधिकांश गुर्गे पुराने ‘आका’ के शरण में चले गये हैं। कुछ अपना वजूद बरकरार रखने की खातिर वारदात को अंजाम दिलाने की तैयारी कर रहे हैं।

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