आजमगढ़। डीजीपी ओपी सिंह भले ही साम्प्रदायिक मोर्चे पर पुलिस की कामयाबी के दावे करे लेकिन सरायमीर में शनिवार को हुए बवाल के बाद कलई खुलती दिख रही है। बलवा कराने की साजिश शुक्रवार से ही रची जा रही थी। आरम्भिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि हिंसा कराने के मुख्य आरोपी एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष व थाने के हिस्ट्रीशाटर कलीम जमई ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरायमीर पुलिस को पहले ही चेतावनी दे दी थी। सोशल मीडिया पर उसने साफ शब्दों में लिखा था कि समुदाय विशेष लोग उसकी औकात बताएंगे। प्रयास पूरी तरह से दंगा भड़काने का था और इसके लिए तैयारियां पूरी थी। बावजूद इसके पुलिस ने ध्यान नहीं दिया जिसका परिणाम बड़े पैमाने पर देर तक बवाल के रूप में सामने आया।

सोशल मीडिया से ही शुरू हुआ था बवाल

खास यह भी रहा कि योजनाबद्ध तरीके के किये बवाल की पृष्टभूमि सोशल साइट पर अभद्र धार्मिक टिप्पणी किए जाने को लेकर तैयार हुई थी। उबैदुर्ररहमान ने शुक्रवार को सरायमीर थाने में कस्बे के नई बाजार मुहल्ला निवासी अमित कुमार साहू के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि फेसबुक पर अमित साहू ने उनके धर्म के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अमित साहू को गिरफ्तार कर लिया और अगले दिन जेल भेजने के लिए तैयारी कर रही थी तब तक बवाल हो गया। हिस्ट्रीशीटर की अगुवाई में वर्ग विशेष के लोगों ने अमित के खिलाफ एनएसए लगाने की मांग करते हुए बलवा कर दिया। पुलिस ही नहीं खुफिया विभाग की लापरवाही सामने आयी है क्योंकि उन्होंने हिस्ट्रीशीटर की धमकी को देखा नहीं या नदरंदाज किया।

लग सकता है एनएसए

हिस्ट्रीशीटर ने भले अमित साहू पर एनएसए लगाने की मांग को लेकर बवाल कराया हो लेकिन डीजीपी के तेवर देख उसकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। डीजीपी ने साफ कर दिया है कि जिन लोगों ने बलवा किया था उनके खिलाफ सख्त निरोधात्मक कार्रवाई होगी जिसमें एनएसए भी शामिल है।

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