वाराणसी। अब तक विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर कछुओं को पकड़ा जाता था और बाद में इन्हें नदियों में छोड़ दिया जाता था। तस्करों ने इससे बचने के लिए नायाब तरीका अपनाया है। अब कछुओं को मारने के बाद उनकी खाल को सुखाया जाता है और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में उंचे दामों में बेच दिया जाता है। यह चौंकाने वाला खुलासा राजस्व असूचना विभाग (डीआरआई) की छापेमारी में हुआ है। अखरी बाइपास पर गुरुवार की रात ट्रक को रोका तो मनीष कुमार निवासी शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) के पड़ते जाने से यह जानकारी सामने आयी। मनीष ने बताया कि इसे बांग्लादेश के माध्यम से मलेशिया, थाईलैंड जैसे दक्षिण पूर्व देशों में अपने आगे की तस्करी के लिए कोलकाता में भी ले जा रहा था। ट्रक के कंटेनर 896 खाली एलपीजी सिलेंडर भी बरामद हुए हैं।

संरक्षित प्राणी में आते हैं कछुए

कछुओं से संरक्षित प्राणी में ही नहीं रखा गया है बल्कि उनके लिए काशी में बाकायदा गंगा में बालू खोदाई पर प्रतिबंध के साथ सेंचुरी बनायी गयी है। बावजूद इसके सच्चाई यह है कि उनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जा रहा है। ट्रक के केबिन में रखे दो बैग से भारतीय कछुआ मूल्य के कुल 547 टुकड़े मिले जिनका वजन 36 किलो है। इसका निर्यात सीमा शुल्क अधिनियम 1962 के तहत और वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रावधानों के तहत भी प्रतिबंधित है। आगे की कार्रवाई के लिए बरामद माल वन्य जीवन प्राधिकरण वाराणसी को सौंप दिया गया था। इसके अलावा, सीमा शुल्क अधिनियम के तहत जांच चल रही है।

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