राम के नाम पर सत्ता पाने वाले कर रहे सीता का ‘अपमान’, सपा ने दी डिप्टी सीएम को चेतावनी

वाराणसी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नरम हिन्दुत्व के फार्मूले को अपनाते हुए दूसरे दल भी इसमें कूद पड़े हैं। यही कारण है कि शनिवार को सपा के महानगर इकाई की मासिक बैठक में एक बाद केन्द्र और प्रदेश सरकार की विफलता गिनाने के साथ डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा का विवादित बयान प्रमुख मुद्दा बना रहा। प्रदेश सचिव प्रदीप जायसवाल ने माता सीता को टेस्ट ट्यूब बेबी बताये जाने पर कहा कि डिप्टी सीएम को दिनेश शर्मा सत्ता के मद में नशे में चूर करार किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि डिप्टी सीएम भाषण करते हुए भूल जाते हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एवं माता सीता के नाम पर ही ये लोग केन्द्र व प्रदेश में सरकार बनाये हैं और भाषणों में माता सीता का अपमान भी कर रहे हैं। माता सीता का चरित्र ऐसा था कि अपहरण करने के बाद भी रावण उनका अपमान करने का साहस नही जुटा पाया और पूरे सम्मान के साथ उन्हें लंका में रक्खा, किन्तु उप मुख्यमंत्री द्वारा ऐसा बयान देना बहुत ही शर्मनाक और आस्था पर चोट करने वाला है। महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल ने कहा कि यदि भाजपा के नेताओं व मंत्रियों द्वारा सत्तामद में चूर होकर धार्मिक आस्था के प्रतिकूल अभद्र टिप्पणी जारी रही तो ऐसा बोलने वाला काशी में प्रवेश नही कर पायेगा। सपा कार्यकर्ता उसे काशी में घुसने नही देंगे भले जेल ही क्यों न जाना पड़े।

हल्ला बोल-पोल खोल के दूसरे चरण को कसी कमर

अर्दली बाजार स्थित कार्यालय पर सम्पन्न हुई, बैठक में सर्वसहमति से निर्णय लिया गया कि पिछले एक पखवाड़े से जिस दमदारी से सफलतापूर्वक सरकारी संस्थानों में व्याप्त घोर भ्रष्टाचार एवं जनहित में जनसमस्याओं की अवहेलना के खिलाफ तथा उसके निराकरण हेतु ‘हल्ला बोल-पोल खोल’ जनांदोलन चलाया गया वैसे ही कार्यक्रम के दूसरे चरण में सोमवार से केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित अन्य विभागों व संस्थानों जैसे-रेलवे डीआरएम कार्यालय, खाद्य एवम रसद आपूर्ति, विद्युत, राष्ट्रीय राज्य मार्ग, शिक्षा, परिवहन, वाणिज्य कर आदि विभागों पर हल्लाबोल जनांदोलन चलाकर जनसमस्याओं से बेखबर कुम्भकर्णी नींद में सो रहे शासन व प्रशासन को जगाया जायगा। बैठक में आगामी लोक सभा के लिए मुख्य संगठन एवं 16 अनुसांगिक संगठनों को अपनी कमेटी के साथ, तीनो विधान सभा एवं 90 वार्डो में बूथ कमेटियों व वार्ड कमेटियों के पुर्नगठन पर रणनीति बनाई गई।

इनकी रही भागीदारी

बैठक में दिलीप डे, पारस नाथ जायसवाल, डा. सूबेदार सिंह, डा. उमाशंकर सिंह यादव, डा. आनन्द प्रकाश तिवारी, विजय जायसवाल, दीपक यादव लालन, अवनीश यादव विक्की, पूजा यादव, मीरा सेठ, उमा रानी यादव, प्रिया राज अग्रवाल, श्वेता पाण्डेय, रितिका रानी, रेखा पाल, सीमा गुप्ता, नीलू पाण्डेय, जियालाल राजभर, ईरशाद अहमद, विवेक यादव, दीपचन्द गुप्ता, राजेश पासी, हारून अंसारी, वरुण सिंह, रविकान्त विश्वकर्मा, भैया लाल यादव, विष्णु शर्मा, शाबानुल मोअज्जम, भारत भूषण यादव, दिनेश प्रताप सिंह गुड्डू, आदि शामिल थे।

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