वाराणसी। तीन दशक से अधिक पुराना सिकरौरा कांड अब फैसले की तरफ बढ़ चला है। अपर सत्र न्यायाधीश (सप्तम) राजीव कमल पाण्डेय की अदालत में विचाराधीन सिकरौरा कांड मामले में शुक्रवार को बचाव पक्ष के बाद अभियोजन और वादिनी के निजी अधिवक्ता की भी बहस पूरी हो गयी। दोनों पक्षों की तरफ से बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने इस मामले में नजीर पेश करने की खातिर अगली तिथि 13 अगस्त मुकर्रर की है। इस मामले में आरोपित एमएलसी बृजेश सिंह को कैंट पुलिस ने कड़ी सुरक्षा घेरे में शिवपुर सेंट्रल जेल से लाकर अदालत में पेश किया। अदालत में तारीख पड़ने के बाद पुलिस बृजेश सिंह को लेकर वापस सेंट्रल जेल लौट गई।

कानूनी दांव-पेंच के संग हाईकोर्ट तक चला मामला

गौरतलब है कि बलुआ (चंदौली) थाना क्षेत्र के सिकरौरा गांव में 9 अप्रैल 1986 को तत्कालीन ग्राम प्रधान रामचंद्र यादव समेत उसके परिवार के सात लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। मामले की सुनवाई पहले भी हो चुकी है लेकिन बृजेश की फरारी के चलते उनकी फाइल अलग थी। भुवनेश्वर (उड़ीसा) में नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी के बाद दूूसरे आधा दर्जन से अधिक मामले खत्म हो गये लेकिन इस मामले की फाइल कोर्ट तक नहीं पहुंची तो वादिनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई आरम्भ हो सकी है। मामले में अभी फैसला नहीं आया है लेकिन इससे पहले विभिन्न बिन्दुओं पर हाईकोर्ट तक गुहार हो चुकी है। माना जा रहा है कि एक-दो तारिख में इस मामले का पटाक्षेप हो जायेगा।

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