वाराणसी। सिकरौरा नरसंहार कांड में आरोपी एमएलसी बृजेश सिंह को एडीजे (प्रथम) पीके शर्मा की अदालत से करारा झटका लगा है। घटना के समय खुद के नाबालिग होने संबंधी याचिका को अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। एडीजे की कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी एमएलसी बृजेश सिंह को घटना के समय बालिग माना है। इसके साथ ही लंबे समय से लंबित चल रहे मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने वादिनी हीरावती को बयान के लिए 23 अक्टूबर को तलब किया है। अदालत के फैसले बाद बृजेश सिंह और सैकड़ों की संख्या में जुटे समर्थक खासे निराश दिखे। पिछली कई तिथियों से इस मामले में पेशी के बाद वापसी हो जाती थी लेकिन अदालत का निर्णय सुनने के बाद सभी के चहरे लटके दिखे।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी सुनवाई
बलुआ थाने (चंदौली) के सिकरौरा गांव में 9 अप्रैल 1986 की रात 11 बजे ग्राम प्रधान रामचंद्र यादव तथा उनके परिजनों समेत 7 लोगो की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में बृजेश सिंह की गिरफ्तारी हुई थी और जमानत के बाद होने के चलते मामले की सुनवाई रुक गयी थी। बाद में उड़ीसा से बृजेश सिंह के वर्ष 2008 में गिरफ्तार होने के बाद वादिनी मृतक की पत्नी हीरावती व उनके पैरोकार राकेश न्यायिक ने हाइकोर्ट के आदेश पर मामले की त्वरित सुनवाई के लिए वाराणसी सत्र अदालत को स्थानातरित कर वादिनी का बयान कोर्ट में शुरू हुआ था।
विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक ने दाखिल किये थे काागजात
सुनवाई आरम्भ होने के साथ बृजेश सिंह ने कोर्ट में आवेदन देकर दलील दी की वह घटना के समय नाबालिग थे और उनकी उम्र हाइस्कूल प्रमाणपत्र में 1 जुलाई 1968 है। इस पर वादिनी के विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक ने आपत्ति दी। राकेश न्याायिक ने बृजेश के विभिन्न प्रान्तों के आर्म्स लाइसेंस,डीएल,पासपोर्ट और कम्पनी रजिस्टार के यहां दिए गए कागजातों में जन्मतिथि 9 नवंबर 1964 का कागजात दाखिल किया। अदालत ने इस मामले में लंबे साक्ष्यो के बाद आरोपी की जन्मतिथि 1964 सही पाया जबकि हाइस्कूल के कागजात में बृजेश सिंह पुत्र रविन्द्र प्रताप सिंह है जबकि बृजेश सिंह पुत्र रविन्द्रनाथ नाम वास्तविक है। आरोपी ने कई मामलो के विचारण के अपने अंतिम बयां में भी जन्मतिथि 1964 माना है। बहरहाल आसार जताये जा रहे हैं कि आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जायेगी।

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