वाराणसी। तीन दशक से अधिक समय पहले बलुआ (चंदौली) के सिकरौरा गांव में हुई हत्याओं का मामला एमएलसी बृजेश सिंह के लिए परेशानी का सबब बन गया है। एमएलसी इस मामले में आरोपित है और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद प्रकरण इस मोड पर पहुंचा है। लंबे समय से किन्ही कारणों से मुकदमे की अहम गवाह हीरावती का बयान नहीं हो पा रहा था लेकिन गुरुवार को अपर जिला जज (तृतीय) राजीव कमल पाण्डेय की अदालत में इसकी कार्रवाई शुरू हो गयी। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी अनिल कुमार सिंह ने गवाह हिरावती देवी का बयान अदालत में दर्ज कराया। गवाह ने घटनाक्रम व विवेचना के दौरान हुई करवाई के संदर्भ में करवाई का हवाला देते हुए अपना बयान दर्ज कराया। अदालत ने गवाह का बयान जारी रखते हुए अगली सुनवाई के लिए 17 जनवरी की तिथि नियत की है।

खचाखच भरी अदालत में छाया रहा सन्नाटा

गवाह के पेशी के दौरान काफी संख्या में पुलिस बल अदालत परिसर में मौजूद रही। उधर अदालत में बृजेश सिंह अदालत में पेश नही हुए। बचाव पक्ष की तरफ से अधिवक्ताओं की टीम थी तो हीरावती के विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक ने भी अभियोजन के संग निजी अधिवक्ताओं को लगाया था। अदालत में जेल अधीक्षक की तरफ से इस आशय का आख्या दिया गया कि बृजेश उपचार के लिए बीएचयू अस्पताल में भर्ती है। जिसके कारण उन्हें अदालत में पेश नहीं किया जा सकता है। हीरावती ने तीन दशक पुरानी वारदात के बाबत सिलसिलेवार बोलना शुरू किया तो वहां सन्नाटा छा गया। बयान दर्ज होने व तारीख पड़ने के बाद पुलिस हिरावती देवी को कड़ी सुरक्षा में लेकर वापस चंदौली लौट गई।

मामले को लेकर पूर्वांचल में खलबली

गौरतलब है कि इस मामले में पहले सुनवाई हो चुकी है और दूसरे सभी आरोपित दोषमुक्त हो चुके हैं। बृजेश की फरारी के चलते उनकी फाइल अलग थी। हाईकोर्ट के आदेश पर मामले का विचारण शुरु हुआ और अब तक कई बिन्दुओं पर वहां से दिश निर्देश जारी हो चुके हैं। बृजेश के करीबियों के संग विरोधियों की इस पर नजर लगी है। यही कारण था कि बृजेश भले नहीं पेश हुए लेकिन बड़ी संख्या में उनके शुभचिंतक अदालत के आसपास मौजूद थे।

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