वाराणसी। तीन दशक पहले हुआ सिकरौरा कांड कानूनी दांव पेंच में उलझता जा रहा है। पहले इस मामले में गवाही न होने को लेकर हाईकोर्ट तक गुहार लगायी गयी थी। महीनों बाद गवाही शुरू हुई तो बचाव पक्ष के बदले अभियोजन की तरफ से प्रार्थनापत्र पड़ रहे हैं। पिछली तारिख पर कोर्ट ने वदिनी और प्रमुख गवाह के न आने पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए डाक्टर के साथ भेजने का आदेश दिया था। बुधवार को विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर राजीव कमल पाण्डेय की अदालत में वादिनी हीरवती फोर्स की मौजूदगी में डाक्टर के साथ पहुंची लेकिन बयान इस बार भी नहीं हो सका।

बचाव पक्ष ने किया विरोध, दी दलीलें

हीरावती की तरफ से अधिवक्ता अश्वनी कुमार और अमरेंद्र विक्रमसिंह और डीजीसी अनिल सिंह ने आवेदन देकर आरोपी बृजेश की उपस्थिति में ही वादिनी का बयान दर्ज किये जाने का अनुरोध किया गया। इसका विरोध आरोपी के अधिवक्ता अशोक सिंह प्रिन्स और शैलेन्द्र सिंह की ओर से किया गया। तर्क दिया कि हाइकोर्ट के आदेश पर वादिनी का बयान अंकित हो रहा है। आरोपित की अनुपस्थिति में बयान होने से न्यायहित विफल नही होगा और विचारण की कार्यवाही किसी पक्षकार की इच्छा से संचालित नही की जा सकता। कोर्ट ने कहा कि 1987 से मामला लम्बित है हाइकोर्ट के आदेशानुसार 31 मार्च तक पत्रवली का निस्तारण किया जाना है। इसके आलावा वादिनी ने भी समय समय पर बयान दर्ज किये जाने की गुहार लगाई गई। डीजीसी ने वादिनी की साढ़े 10 बजे कोर्ट में मौजूदगी के बाद भी बीते 11 जनवरी को 2 बजे के बाद बयान दर्ज कराया गया। अब अभियोजन ही आरोपी की गैर मौजूदगी में ब्यान दर्ज न किये जाने का अनुरोध किया गया ऐसे में डीजीसी का यह आचरण उचित नही कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा की बयान के समय आरोपी की मौजूदगी आवश्यक नही यह शिनाख्त की कार्यवाही के समय आवश्यक है।

एमएलसी कोर्ट में पेश न करना एसएसपी की लापरवाही

अलबत्ता कोर्ट ने आरोपित एमएलसी बृजेश सिंह की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न कराने पर एसएसपी की लापरवाही को लापरवाही माना है। अदालत ने कहा कि यह विचारण उच्च न्यायालय के निर्देश पर शीघ्रतिशीघ्र पूरा किया जाना है। ऐसे में एसएसपी को निर्देशित किया जाता है कि आरोपी की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित कराने हेतु समुचित व्यवस्था प्राथमिकता के तौर पर करे। अदालत ने साक्षी हिरावती और आरोपी बृजेश को व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए एसएसपी,एसपी चंदौली,वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार और डीजीसी को सूचित करने के साथ आदेश की प्रति महानिदेशक अभियोजन को भेजे जाने का आदेश दिया। साथ ही सुनवाई की अगली तिथि 2 फरवरी नियत कर दी।

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