वाराणसी। तीन दशक से पहले हुआ सिकरौरा कांड नित नये मोड लेता जा रहा है। बहुचर्चित मामले में सकलडीहा से सपा विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव का शुक्रवार को बयान दर्ज किया गया। इससे पहले गवाही देने के लिए विशेष न्यायाधीश(गैंगस्टर एक्ट) राजीव कमल पांडेय की अदालत ने पूर्व विधायक को तलब की थी। अभियोजन पक्ष के गवाह प्रभु नारायण सिंह का बयान दर्ज होने के पश्चात बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीनानाथ सिंह, अशोक प्रिंस व शैलेन्द्र सिंह ने गवाह से जिरह की। अदालत का समय समाप्त होने तक जिरह की कार्रवाई पूर्ण नहीं होने पर न्यायाधीश ने इसे जारी रखते हुए सात मई की तिथि मुकर्रर कर दी। इस मामले में आरोपी एमएलसी बृजेश सिंह को कडी सुरक्षा व्यवस्था में शिवपुर सेंट्रल जेल से लाकर अदालत में पेश किया गया था। मुकदमे में सुनवाई के लिए अगली तिथि तय होने पर पुलिस बृजेश सिंह को लेकर जेल चली गई।

तहरीर लेखक से आये प्रत्यक्षदर्शी की भूमिका में

गौरतलब है कि लगभग 31 साल पहले बलुआ (चंदौली) के सिकरौरा गांव में ग्राम प्रधान रामचंद्र यादव समेत 7 लोगों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में एमएलसी बृजेश सिंह समेत कई लोगो को आरोपी बनाया गया था। हीरावती के अनपढ़ होने के कारण प्रभुनारायण सिंह यादव ने घटना की तहरीर लिखी थी। अपने अधिवक्ता योगेन्द्र नारायण सिंह, विश्राम यादव और अमरेन्द्र विक्रम सिंह के साथ कोर्ट पहुंचे विधायक ने अभियोजन के कथन का समर्थन किया। साथ ही दूसरी बातें भी बतायी। हीरावती के विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक के मुतबिक विधायक ने पहचान भी की।

पुराने प्रतिद्वंदी, कड़ी सुरक्षा के थे इंतजाम

बृजेश के भतीजे सुशील सिंह ने एक बार धानापुर और दूसरी बार सकलडीहा से प्रभुनारायण को पराजित किया था। अलवत्ता पहली बार सुशील चुनाव भी उन्हीं से हारे थे। दोनों के बीच राजनैतिक प्रतिद्वंदिता लंबे समयसे चली आ रही है। गवाही के लिए भी प्रभुनारायण काफिले के साथ समर्थकों के संग पहुंचे थे। इसे ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के पुख्ता बदोबस्त किये गये थे। दो सीओ के अलावा कई थानेदारों के संग पीएसी लगायी गयी थी।

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