वाराणसी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उम्मीद जतायी जा रही थी कि सिकरौरा कांड में वादिनी व मुकदमे की अहम गवाह हिरावती देवी की गवाही हो जायेगी लेकिन ऐसा न हो सका। वजह, आरोपित एमएलसी बृजेश सिंह अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत में सेंट्रल जेल के अधीक्षक की तरफ से इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया गया कि बृजेश सिंह को बीमारी के चलते बीएचयू में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। ऐसे में उन्हें अदालत में पेश नहीं किया जा सकता है। इससे पहले अपर जिला जज (तृतीय) की अदालत में कड़ी सुरक्षा में हीरावती को लेकर चंदौली पुलिस पहुंची थी। कोर्ट ने सुनवाई के लिए छह जनवरी की तिथि नियत की है।

सुनवाई स्थगित रखने की भी गुहार

आरोपित एमएलसी बृजेश सिंह के तरफ से उनके अधिवक्ता ने इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया कि सिकरौरा कांड के साथ ही ब्रजेश के खिलाफ गैंगेस्टर मामले में भी सुनवाई हो रही है। ऐसे में गैंगेस्टर मामले की सुनवाई पूरी होने तक सिकरौरा कांड की सुनवाई स्थगित रखी जाये। अदालत ने इस मामले में वादिनी व डीजीसी की तरफ से आपत्ति दाखिल करने व सुनवाई के लिए अगली तिथि 6 जनवरी नियत कर दी। साथ ही अदालत ने चंदौली पुलिस व सेंट्रल जेल के अधीक्षक को अगली तिथि पर वादिनी व आरोपी एमएलसी को कड़ी सुरक्षा में अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया।

खचाखच भरी थी अदालत

बहुचर्चित नरसंहार पर बृजेश के करीबियों के संग विरोधियों की भी नजर लगी है। इसकी बानगी उस समय देखने को मिली जब एडीजे कोर्ट खचाखच भरी थी। सुरक्षा में लगी पुलिस को भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही थी। बृजेश की तरफ से वकीलों की फौज थी जो बिन्दुवार सवाल करती जा रही थी। प्रदेश बार कौंसिंल के सदस्य हरिशंकर सिंह, सेन्ट्रल बार के निवर्तमान अध्यक्ष अशोक सिंह प्रिंस, वरिष्ठ अधिवक्ता देवेन्द्र सिंह, शैलेन्द्र सिंह आदि थे। दूसरी तरफ अभियोजन की तरफ से डीजीसी अनिल सिंह के अलावा वादिनी के विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक, योगेन्द्र नारायण सिंंह,अश्वनी गुप्ता, अमरेन्द्र विक्रम व विश्राम यादव ने पैरवी की।

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