वाराणसी। पूर्वांचल का एम्स कहे जाने वाले बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल को न जाने किसकी नजर लग गई है। गैस कांड के बाद अस्पताल सवालों के घेरे में है। इस घटना के बाद बीएचयू अस्पताल की छवि पर गहरा धक्का पड़ा है। अस्पताल की विश्वसनीयता पर सवाल उठन लगे है, बावजूद अस्पताल प्रशासन सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल में सुविधाएं को बढ़ाने के नाम पर हर साल करोड़ों रूपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। मरीजों का आरोप है कि ना तो वक्त पर डॉक्टर देखते हैं और ना ही जांच की मुकम्मल व्यवस्था। यही नहीं सबसे ज्यादे परेशानी मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को हो रही है। तीमारदारों के लिए कोई कॉमन हॉल नहीं है। लिहाजा हजारों लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर रहते हैं।

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ओपी ने जाना अस्पताल का हाल

बीएचयू से छात्र राजनीति की शुरूआत करने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री और दिग्गज सपा नेता ओमप्रकाश सिंह ने सर सुंदरलाल अस्पताल का जायजा लिया। उन्होंने मरीजों के साथ तिमारदारों से बातचीत की तो हैरान करने वाली हकीकत से रूबरू हुए। कई मरीजों ने अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं को लेकर उनसे शिकायत की। अमृत प्रभात डॉट कॉम से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगर ऐसी विकट स्थिति जब हमारे प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का है तो अन्य जगहों की क्या हाल होगा ? ऐसे संसदीय क्षेत्र को टोक्यो की तरह बनाने की बात करने वाले मोदी जी इस मंजर को देख लें तो उन्हें सहज ही अंदाज लग जायेगा कि उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है। यहां हवा हवाई बात करने से विकास नहीं होगा। मोदी जी के राज में सिर्फ बातें हो रही हैं, वो भी बात झूठी  है। उन्होंने कहा कि काश कोई मोदी जी तक हम सबकी इस पीड़ा को पहुंचने वाला होता तो हमलोगों के साथ-साथ प्रतिदिन यहां इलाज करने वालों का भी भला हो जाता।

ऐसा है सर सुंदरलाल अस्पताल ?

 नवनिर्मित ट्रामा सेंटर को लेकर सरसुंदर लाल अस्पताल की कुल क्षमता 1899 मरीजों की है। अस्पताल में प्रतिदिन 5300 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा प्रतिदिन अस्पताल में कुल 60 मेजर और माइनर ऑपरेशन होते हैं। इस दौरान 60 मरीजों की प्रतिदिन इंडोस्कोपी होती है। अगर ऑक्सीजन की खपत की बात करें तो यहां प्रति हर हफ्ते 10 हजार प्रति लीटर ऑक्सीजन मंगाई जाती है। ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू और अन्य वॉर्डों में पाइप के जरिए ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि एक टैंकर लिक्विड ऑक्सीजन का भंडारण हमेशा रहता है ताकि किसी बड़ी आपदा से निबटा जा सके। अस्पताल पर लगभग 4-5 करोड़ लोगों की निर्भरता है।

 

 

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