वाराणसी। एक सज्जन को बिना बीमारी के बीएचयू में भर्ती करा दिया जाता है जो दूसरी तरफ सीवियर अटैक के बावजूद पीजीआई से रिस्चार्ज कर देना। एक तरफ डाक्टर जेल से बीएचयू देता है तो वहीं जिला प्रशासन और डाक्टरों के रेफर करने के बाद भी इलाज तक कायदे से नहीं होता। यह षडयंत्र नहीं तो और क्या है? इससे तो यही लगता है कि दोबारा कोई अटैक हो तो मेडिकल न मिल सके। पूर्व सांसद व मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी की पीड़ा अमृत प्रभात से बातचीत में कुछ यूं झलकी कि बावजूद इसके मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। उसकी जब तक इच्छा नहीं होगी तो कोई नहीं मार सकता है। वहां से परवाना कटा तो किसी अस्पताल में रहे लेकिन बच नहीं सकता।

जलते हैं लोकप्रियता से

पूर्व सांसद का कहना है कि मुख्तार की लोकप्रियता से विरोधी जलते हैं। आने के साथ हमसे पूछा गया कि इतने लोगों को क्यों बुला लिया। मेरा कहना है कि आठ घंटे गाडी चला कर आ रहा हूं। मिनट टू मिनट चेक कर लें। जो टीवी पर रिले हो रहा है उसे सारा देश देख रहा है। हमदर्दी रखने वाले तो आयेंगे ही। कोई कटप्पा भेजता है। देश का प्रधानमंत्री कहता है कि मुस्कुराता हुआ जेल से निकलता है। जबाव जनता ने दे दिया।

बात करने से नहीं आता रामराज

किसी के लिए इतनी नफरत और किसी से इतनी चाहत। राम राज की बात करने से नहीं होता। उनके राज में सभी के लिए समानता थी लेकिन यहां पर क्या हो रहा है। एक को घर में बैठा दिया और दूसरे को प्रदेश की सबसे दूर की जेल में भेज दिया जाता है। बांदा का जेल प्रशासन लिखता है कि यहां 11 दुर्दांत और इनामी डकैत हैं। दूसरे के संग ऐसा क्यों नहीं। उन्हें तो घर में बैठा दिया जाता है।

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