गाजीपुर। मोहम्मदाबाद के भाजपा विधायक स्व. कृष्णानंद राय की हत्या को 13 साल बीत चुके हैं। हर साल उनकी शहादत दिवस पर 29 नवंबर को कार्यक्रम आयोजित होते हैं लेकिन इस बार गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा से लेकर भाजपा विधायकों तक ने जिस तरह आरोपों की झड़ी लगा दी उससे सियासत गरमा गयी है। हत्या की साजिश रचने के आरोप में मऊ सदर के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी वारदात के पहले से जेल की सलाखों के पीछे हैं और अभी तक मुक्ति नहीं मिल सकी है। बावजूद इसके इस बार मंच से आरोपों के दायरे में सपा सुप्रीमो रह चुके मुलायत सिंह यादव थे। मनोज सिन्हा ने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि पिछली सरकार में इस्लामिक आतंकवाद सरकारी संरक्षण में था तो विधायक सुशील सिंह का दावा था कि एक आला पुलिस अफसर ने इनामियों के किसी बड़ी वारदात के इरादे से जुटने की सूचना तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह को दी थी लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान न देने को कहा था।

अलका राय को विश्वास है न्याय मिलना तय

स्वर्गीय कृष्णानंद राय की पत्नी और मोहम्मदाबाद की मौजूदा विधायक अलका राय अब भी पुरानी बातों को याद कर भावुक हो जाती है। कुरेदने पर उन्होंने कहा कि तब हमारी सरकार नहीं थी जिसकी वजह से न्याय मिलने में इतनी देरी हो रही है। इसे परिभाषित करते हुए उनका कहना था कि एक न्याय जनता द्वारा मिलता है जबकि दूसरा भगवान के दरबार में मिलता है। न्याय मिलना ही मिलना है इसमें कोई दो राय नहीं है। गौरतलब है कि 29 नवंबर 2005 को बसवानी चट्टी पर तत्कालीन बीजेपी विधायक कृष्णानन्द राय समेत सात लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी।

डॉन का खुल कर नहीं लिया नाम

खास यह भी रहा कि हत्याकांड के मुख्य आरोपित माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की 9 जुलाई को बागपत जेल में हत्या कर दी गयी थी। मंच से जेल में सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर तमााम दूसरी बातों का जिक्र करने वालों ने भी खुल कर बजरंगी का नाम नहीं लिया। अलबत्ता इशारों में इस ‘काम’ क्रेडिट लेने की कोशिश जरूर की।

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