वाराणसी। अपने जमाने की मशहूर गाइनोलाजिस्ट प्रो. शैल दूबे चिकित्साजगत ही नहीं बल्कि काशी के लिए जाना-माना नाम हैं। उम्र 80 का पार होने लगी तो फेल्ड बैक सिंड्रोम से पीड़ित होकर वह खुद मरीज बन गयी। सात साल पहले दिल्ली में आपरेशन कराया लेकिन दर्द की समस्या छह माह में फिर लौट आई। कई साल तक दर्द की दवाओं तथा फिजियो थिरेपी के सहारे काम चला लेकिन तकलीफ कम होने की बजाए बढ़ती ही गई। कमर व पैरों में दर्द के कारण इनका उठना बैठना तकलीफों से भरा था। इस बीमारी का इलाज कराने के लिए प्रो. शैल न सिर्फ पीजीआई व एम्स बल्कि आस्ट्रेलिया तक का चक्कर भी काट कर थक चुकी थीं। आस्ट्रेलिया में तो एक करोड़ रुपये की मांग की गयी और सफलता की संभावना महज 35 फीसदी बतायी गयी। लंबे समय तक चिकित्सा जगत से जुड़ी रहने के चलते वह पेचीदगी जानती थी।

बीएचयू ट्रामा सेंटर में पांच घंटे चला आपरेशन

थक हार कर प्रो. दुबे बीएचयू ट्रामा सेंटर में आथोर्पेडिक विभाग में प्रो. अनिल राय को दिखाया। रीढ़ का एक बार आॅपरेशन होने के चलते अब यह केस जटिल हो गया था। जिसे फेल्ड बैक सिंडोम कहा जाता है। यह जटिल आॅपरेशनों की श्रेणी में पहुंच चुका था। ऐसे में कोई भी डॉक्टर आॅपरेशन को तैयार नहीं हो रहा था। आस्ट्रेलिया के सरकारी अस्पतालों ने तो आॅपरेशन करने से मना ही कर दिया। जबकि वहीं के प्राइवेट अस्पताल में इस सर्जरी का खर्च करीब एक करोड़ रुपए बताया। खास यह कि आठ साल पूर्व भी प्रो. शैल दुबे ने प्रो. अनिल राय को दिखाया था उस समय प्रोे. राय ने आॅपरेशन की सलाह दी लेकिन वह पीजीआई व एम्स में दिखाने चर्ली गई थीं। बीएचयू ट्रामा सेंटर में करीब पांच घंटे तक चले इस आॅपरेशन में रीढ़ की हड्डी को सोलह पेंच लगाकर कसा गया। ताकि नसों पर पड़ने वाले दवाब को दूर किया जा सके। प्रो. अनिल राय ने रीढ़ की हड्डी को सीधा किया तथा अपनी जगह से खिसकी कई जोडों़ को सीधा कर पेंच लगा दिया। नस में दबाव के कारण प्रो. शैल को दाहिने पैर में असहनीय पीड़ा होती थी। इस आॅपरेशन के बाद प्रो. शैल का दर्द गायब हो गया और वह वॉकर के सहारे चल फिर रहीं हैं।

बना नया कीर्तिमान

प्रो. शैल दूबे की 87 वर्ष की अवस्था में रीढ़ की जटिल सर्जरी कर बीएचयू के ट्रामा सेंटर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आॅपरेशन करने वाली टीम में प्रो. एके राय के साथ डॉ. अभीजीत ,डॉ शुभांशु शेखर डॉ आनंद सौरभ, डॉ फैजल, डॉ विशाल तथा एनेस्थिसिया विभाग की डॉ. मंजरी व डॉ. रंजन ने सहयोग किया। प्रो. अनिल राय ने बताया कि अधिक उम्र के कारण आॅपरेशन जटिलताओं से भारा था लेकिन दर्द से निजात दिलाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था इस लिए आॅपरेशन का निर्णय लिया गया। इस उम्र में रीढ़ का आॅपरेशन कर बीएचयू आईएमएस ने भी एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।

admin

No Comments

Leave a Comment