सुरक्षा बहाल नहीं हुई उल्टे बाहुबली धनंजय की मुश्किलें और बढ़ी, बडा सवाल गोपनीय दस्तावेज देने वाला कौन है ‘करीबी’

लखनऊ। बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह को लेकर हाईकोर्ट ने जिस कदर सख्त रुख अख्तियार किया है उससे प्रदेश शासन के गृह विभाग में खलबली मची है। दरअसल सुरक्षा की मांग को लेकर धनंजय की तरफ से जो दस्तावेज कोर्ट में उललब्ध कराये गये थे वह परम गोपनीय की श्रेणी के थे। इस गोपनीय कागजात तक पहुंच को लेकर कोर्ट ने तेवर अपनाते हुए यहां तक कह दिया कि याचिका का निस्तारण तो हो जाता लेकिन यह जानना जरूरी है कि इस तक याची की पहुंच कैसे हुई। कोर्ट ने मुख्य सचिव से इसका कारण पूछा तो प्रमुख सचिव गृह ने एसआईटी जांच बैठा दी है। हाईकोर्ट को 17 अप्रैल तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट देनी है जिसे लेकर मत्था-पच्ची शुरू हो गयी है। जबाव हर हाल में देना है लेकिन गोपनीय दस्तावेज किसने उपलब्ध कराये और ठीकरा किसके सिर फूटेगा इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

हाईकोर्ट के रूख से ही खत्म हुई थी सुरक्षा

गौरतलब है कि पूर्व सांसद को पहले केन्द्र की तरफ से वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली थी जिसमें अत्याधुनिक असलहों से लैस केन्द्रीय अर्धसैनिक बल का दस्ता साथ में चलता था। हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की गयी थी जिसमें पूर्व सांसद के खिलाफ दर्ज 28 आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए इसे खत्म करने का अनुरोध किया था। हाईकोर्ट ने इस पर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था। इसकी सुनवाई के एक दिन पहले ही सुरक्षा हटाने के साथ जवाब दाखिल किया गया था कि सुरक्षा नहीं है। धनंजय ने इसे चुनौती दी थी लेकिन चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस एसएस शमशेरी की पीठ ने गोपनीय दस्तावेजों को लेकर सुलगते सवाल उठाये हैं।

मुख्य सचिव के हलफनामे में यह सफाई

हाईकोर्ट में मुख्य सचिव ने जो हलफनामा दाखिल किया है उसके मुताबिक धनंजय से इस बाबत पूछा गया तो उनका कहना था कि एक पत्रकार ने उन्हें बताया था कि यह दस्तावेज उसके पास हैं। उस पर उन्होंने अपना अधिवक्ता को इन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने के लिए कहा था। हाईकोर्ट के तेवर से यही लगता है कि मामला खत्म होने वाला नहीं है और गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले के संग कइयों पर गॉज गिर सकती है। जिसने ‘नेतागिरी’ सिखायी उसी सरयू पाण्डेय के पुत्र का मुकाबला करेंगे अफजाल भाई, मनोज सिन्हा भी देते हैं इनकी दुहाई.

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