गाजीपुर। यूपी के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण के साथ ही कई सवाल उठने लगे हैं। खासतौर से गाजीपुर में नई सरकार और मंत्रिमंडल को लेकर सियासत शबाब पर है। सीएम की रेस में आगे चल रहे मनोज सिन्हा को साइड लाइन करने के बाद अब उनकी करीबी विधायक संगीता बलवंत को भी धोखा मिला है। मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीदों के साथ लखनऊ पहुंचीं संगीता बलवंत को अंतिम वक्त पर जो झटका मिला है, उससे पूरा गाजीपुर स्तब्ध है। अब सवाल ये है कि शपथ ग्रहण के ठीक पहले आखिर ऐसा क्या हुआ कि संगीता बलवंत मंत्री नहीं बन पाई।

संगीता बलवंत को आया था बुलावा

अमृत प्रभात डॉट कॉम से बीतचीत में संगीता बलवंत ने स्वीकार किया कि उन्हें शपथ ग्रहण के लिए बुलावा आया था। यही नहीं मीडिया के पास पहुंची मंत्रियों की लिस्ट में भी उनका नाम था। इसे लेकर गाजीपुर में लोगों ने जश्न मनाना भी शुरू कर दिया। लेकिन दोपहर बाद अचानक लोगों का जश्न काफूर हो गया। शपथ ग्रहण लेने वालों में संगीता बलवंत को शामिल ना देख, लोग अवाक रह गए। लोग समझ नहीं पाए कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बुलावे के बावजूद संगीत बलवंत शपथ नहीं ले पाई। सिर्फ लोग ही नहीं खुद संगीता बलवंत भी समझ नहीं पाईं कि उनके साथ ऐसा क्यों किया गया। अमृत प्रभात डॉट कॉम से बातचीत के दौरान संगीता ने बेहद सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हां मुझे मंत्री बनने के लिए बुलाया गया था। लेकिन अंतिम वक्त में क्या हुआ, मुझे नहीं मालूम ? उन्होंने कहा जनता ने मुझे सेवा करने के लिए चुना है और ये काम मैं आगे भी करती रहूंगी।

मनोज सिन्हा की करीबी हैं संगीता बलवंत

गाजीपुर सदर से विधायक संगीता बलवंत को केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा का करीबी माना जाता है। मनोज सिन्हा कहने पर ही संगीता बलवंत को टिकट मिला था। विधानसभा चुनाव में संगीता बलवंत की जीत के लिए मनोज सिन्हा ने ऐड़ी चोटी का जोर लगाया था। लेकिन जिस तरीके से पहले मनोज सिन्हा को झटका लगा और उसके बाद उनके करीबी संगीता बलवंत को धोखा मिला, उससे सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों पर संगीता को लेकर चर्चा चल रही है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर कौन है जिसके कहने पर संगीता को मंत्री नहीं बनाया गया, जबकि सब कुछ पहले से तय था। सोशल मीडिया पर जो खबरें प्रचारित हो रही हैं उसके मुताबिक बीजेपी की एक लॉबी नहीं चाहती है कि पूर्वांचल की सियासत में मनोज सिन्हा का कद बढ़े। पहले उनका पत्ता काटा गया और अब संगीता बलवंत का।

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