वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में गंगा पुत्र कहे जाने वाले नाविकों ने अब स्थानीय जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हड़ताल का ऐलान कर दिया है। गंगा में निजी कंपनी द्वारा नाव उतारने की सुगबुगाहट के बाद नाविक गुस्से में हैं। नाविकों ने मंगलवार को गंगा में नावों का संचालन ठप कर दिया।

नाविकों के सामने रोजी रोटा का संकट

नाविकों की चिंता इस बात की है अगर गंगा में निजी कंपनी अपनी नाव उतारती है तो उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। नाविक नहीं चाहते हैं की स्थानीय मल्लाहों के अलावा कोई दूसरी कंपनी गंगा में नाव उतारे। नाविकों के के मुताबिक जिला प्रशासन ने पहले ही कछुआ सेंचुरी के नाम पर तमाम बंदिशें लगा रखी है। गंगा में खनन के अलावा मछली मारने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। अगर ऐसे  में नाव संचालन का काम भी उनसे छीन लिया जाएगा तो फिर उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। निषाद समाज के अध्यक्ष विनोद निषाद कहते हैं कि जेटी की वजह से नाविक पहले ही परेशान हैं अब जिला प्रशासन की ये कोशिश उनके कारोबार को ठप कर देगा।

नए साल पर सैलानियों का मजा किरकिरा

नए साल पर काशी के प्रसिद्ध घाटों का दीदार करने के लिए लाखों की संख्या में देसी और विदेशी सैलानी वाराणसी पहुंचे हुए हैं। इस बीच नाविकों की हड़ताल के चलते इन सैलानियों का मजा किरकिरा हो गया। गंगा में नौका विहार की हसरत अधूरी रह गई। नावों का संचालन ना होने से सैलानी निराश दिखे। बताया जा रहा है कि मौजूदा वक्त में सिर्फ 25 फीसदी ही नावें गंगा में चल रही हैं। इन नावों की बुकिंग काफी पहले ही हो गई थी। बुकिंग की मियाद खत्म होते ही नावों का संचालन पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

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