‘वित्तीय अनियमितता’ और पद के ‘दुरुपयोग’ पर छिन गये प्रदेश बार कौंसिंल अध्यक्ष के अधिकार, 10 दिन में देना है जवाब

प्रयागराज। चुने अध्यक्ष के पदभार ग्रहण के पहले हुई हत्या के चलते प्रदेश बॉर कौंसिल के अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान होने वाले हरिशंकर सिंह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। इसके एक माह पहले ही बार कौंसिल आफ इंडिया ने अगले आदेशों तक इनके सारे पदीय अधिकार छीन लिये हैं। इससे पहले प्रदेश बार कॉउन्सिल के कई सदस्यों ने बार कौंसिल आॅफ इंडिया से हरिशंकर सिंह के खिलाफ शिकायत की थी। इसमें वित्तीय दुरुपयोग, पद का दुरुपयोग और बिना बार काउंसिल की सहमति के निलंबित सचिव रामजीत सिंह को मनमाने ढंग से बहाल करना शामिल है। निलंबित सचिव हाईकोर्ट जज की जांच में 72 लाख रुपये के गबन के दोषी पाये गये हैं।

इन बिन्दुओं पर देना होगा जवाब

बार कौंसिल आॅफ इंडिया ने अगले आदेश तक इनके सारे पदीय अधिकार छीनने के साथ बिन्दुवार जवाब मांगा है। हरि शंकर सिंह से पूछा गया है कि वह बताये कि किस परिस्थिति में उन्होंने एक अनधिकृत क्लर्क के साथ एक संयुक्त बैंक खाता खोला और उस खाते में नामांकन शुल्क के रूप में एकत्र की गई राशि को बार काउंसिल आॅफ उत्तर प्रदेश से बिना किसी अधिकार के प्राप्त कर लिया। बीसीआई ने उन्हें यह भी बताने का निर्देश दिया कि कैसे, बार काउंसिल आॅफ उत्तर प्रदेश से अधिकार प्राप्त किए बिना निलंबित सचिव राम जीत सिंह को बहाल करने के लिए उनके द्वारा एक ‘अवैध आदेश’ को पारित किया गया था।

बीसीआई के उपाध्यक्ष को मिली जिम्मेदारी

बीसीआई ने 14 मार्च के बाद हरिशंकर सिंह द्वारा पारित सभी आदेशों को स्टे कर दिया है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत उनके स्थान पर बार काउंसिल आॅफ इंडिया के उपाध्यक्ष देवेंद्र मिश्रा नागरहा बीसीआई के आदेश के अनुसार अध्यक्ष के पद का कार्यभार संभालेंगे। बार काउंसिल आफ इंडिया के सचिव श्रीमन्तो सेन ने हरिशंकर सिंह को नोटिस जारी कर सदस्यों की ओर से उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों की 10 दिन के भीतर सफाई मांगी है। हरिशंकर सिंह पर यह भी आरोप थे कि वह पद का दुरुपयोग कर मनमानी पर उतारू हैं। उनका कार्यकाल 8 जून को समाप्त हो रहा है। चुनाव के लिए बैठक बुलाने से लाक डाउन के बहाने इन्कार कर दिया है। बार काउंसिल के अध्यक्ष लूट में लगे हैं।

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