वाराणसी। चौक पुलिस द्वारा हाइकोर्ट से मिली जमानत में एक जमानतदार के सत्यापन रिपोर्ट को गलत और गुमराह करने वाला मानते हुए विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर राजीवकमल पाण्डेय ने तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने एसएसपी को निर्देशित किया है कि वह पुलिस मैन्युअल के तहत संबधित एसआई व प्रभारी निरीक्षक चौक पर कार्यवाही के लिए सक्षम हैं। ऐसे में इस प्रकरण में जांच अपने स्तर से करके दोषी व्यक्ति पर कार्यवाही कर कोर्ट को 7 दिन के अंदर आख्या प्रेषित करें।

जिसे लेकर दी थी रिपोर्ट उसी ने खोल दी कलई

दरअसल मामले के मुताबिक एक जमानतदार के सत्यापन रिपोर्ट में चौक के एसआई रामसजन यादव द्वारा तैयार आख्या जिसे प्रभारी निरीक्षक ने सत्यापित किया गया था उसमे कहा गया कि जमानतदार हीरालाल जमानत नहीं लेना चाहते। उसे गुमराह कर हस्ताक्षर बनवाया गया और तहरीर भी दी गई जिसमे जमानत लेने से इंकार किया गया। इस बीच हीरालाल ने कोर्ट में शपथपत्र दखिलकर कहा गया कि उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराया गया और कहा गया कि जांच रिपोर्ट चली जायेगी परन्तु उसपर अपने मन से लिख दिया गया कि वह जमानत नहीं लेना चाहता बल्कि सत्यता यह है की आज भी जमानतदार जमानत लेने को तैयार है। कोर्ट ने इन तथ्यो का संज्ञान लेते हुए एसआई और प्रभारी निरीक्षक चौक के खिलाफ नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा गया कि 19 मई तक यह स्पष्ट करे कि उनके द्वारा किया गया कृत्य न केवल हाइकोर्ट के आदेश के विरुद्ध है अपितु आरोपी को दिए गए मौलिक अधिकार में हस्तक्षेप है क्यों इस प्रकरण में सुसंगत धाराओ में अभियोग पंजीकृत कराते हुए आवश्यक कार्यवाही की जाय।

जमानतदार ने जतायी फर्जी फंसाने की आशंका

जमानतदार ने कोर्ट को इस तथ्य से भी अवगत कराया है कि कोर्ट कोई नोटिस जारी करता है तब पुलिस वाले उसे और उसके परिवार वालो को झूठे मुकदमे में फंसा सकते है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब अदालत के जमानत आदेश को निष्प्रभावी बनाने के लिए पुलिस इस स्तर तक जा सकती है तब वह हीरालाल और उसके परिवार पर दबाब बनाने के लिए झूठे मुकदमे में फंसा सकती है।

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