पटना। किसानों-मजदूरों को संगठित कर अंग्रेजी हुकूमत की चूल हिला देने वाले स्वामी सहजानंद के साथ उस समय के इतिहासकारों ने न्याय न किया हो लेकिन अमेरिकी विचारक एंव वर्जिनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वाल्टर हौजर ने मशक्कत के बाद इसके दस्तावेज जुटाये थे। लगभग 90 के दशक मे प्रोफेसर वाल्टर हौजर ने बिहार के धधकते खेत-खलिहानो पर आधारित एंव किसान आंदोलन की राख के अंदर की आग की तपिश का आंकलन करने हेतु भारत प्रवास के दौरान इन दस्तावेजो को भारत के (खास तौर पर बिहार ) दूर दराज क्षेत्रों से एकत्रित कर अपना शोध ग्रंथ तैयार किया था। एएन सिन्हा सभागार में इन दस्तावेजो की प्रोफेसर वाल्टर हौजर के प्रतिनिधि विलियम आर पिंच ने एक समारोह में दंडी स्वामी सहजानंद सरस्वती की जीवनी से संबधित दस्तावेजों की पुनर्वापसी की गयी ।

डिप्टी सीएम ने की शोध संस्थान और म्यूजियम बनवाने की घोषणा

इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने स्वामी सहजानंद शोध संस्थान और म्यूजियम बनवाने की घोषणा की जहां स्वामी से संबधित दस्तावेज संरक्षित किये जायेंगे ताकि आम जनमानस उनके बारे ज्ञान अर्जित कर सके। समारोह मे बिहटा हवाई अड्डे , रेलवे स्टेशन का नाम स्वामी जी के नाम पर करने की मांग उठी। इसी के साथ ही पाठ्यक्रम मे भी स्वामी जी संबधित अध्याय जोडने की मांग भी की गयी। कार्यक्रम मे अखिल भारतीय अग्रगामी किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व स्वामी सहजानंद सरस्वती रचनावली के संपादक प्रख्यात लेखक एंव विचारक राघव शरण शर्मा जी भी विशेष रूप से आमंत्रित थे। प्रोफेसर वाल्टर हौजर के प्रतिनिधि विलियम आर पिंच ने प्रोफेसर वाल्टर हौजर के अनन्य मित्र राघव शरण शर्मा के साथ समुचित समय बिताया और पुराने संस्मरणो को सुनते रहे।

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