बलिया। सूबे की सरकार पुलिस और एंबुलेंस सेवाओं को मिनटों में पहुंचने का दवा करती है लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर है। महिलाओं के प्रसव पीड़ा के वक्त तुरंत अस्पताल पहुचाने के लिए सरकार के 102 नम्बर की एम्बुलेंस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ताजा मामला बलिया रेलवे स्टेशन का है जहां छपरा से वाराणसी जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन का है। यहां प्रसव पीड़ा से परेशान एक अकेली महिला यात्री ने ट्रेन में ही अपने बच्चे को जन्म दे दिया। ट्रेन के बलिया स्टेशन पहुचने पर उसे अस्पताल पहुचाने के लिए बार बार 102 नंबर की सरकारी एम्बुलेंस को फोन करने पर भी 102 नंबर एम्बुलेंस का फोन नहीं रिसीव हुआ । मजबूर आरपीएफ के जवानों ने टेम्पो (आॅटो) में पीड़ित महिला को लावारिस के रूप में रख कर जिला महिला चिकित्सालय भेजवाया गया । जहां महिला और उसके बच्चे को किया गया भर्ती।

घंटों रूकी रही ट्रेन लेकिन पसीजे नहीं स्वास्थ्यकर्मी

आरपीएफ थाना प्रभारी संजय पाण्डेय ने स्वीकार किया कि इंटरसिटी एस्प्रेस में अकेली जा रही महिला बलिया स्टेशन पर प्रसव पीड़ा से पीड़ित थी। सहयात्रियों की सूचना पर ट्रेन को महिला को मदद के लिए घंटो रोक दिया गया और रेलवे पुलिस ने 102 नंबर एम्बुलेंस को बार-बार फोन किया। महिला ने ट्रेन में ही एक बच्ची को जन्म दिया लेकिन 102 नंबर एम्बुलेंस नही आई। लाचार होकर आरपीएफ के जवानो ने प्राईवेट वाहन से जिला चिकित्सालय भेजवाया गया। बहरहाल प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला को जिला महिलाचिकित्सालय में इलाज किया जा रहा जहां जच्चा-बच्चा दोनों सही हैं। बावजूद इसके बड़ा सवाल यह है कि महिला को जिलामहिला चिकित्सालय में कोई भी रेलवे का जिम्मेदार अधिकारी देखने तक नहीं गया।

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