बागपत। जेल की सलाखों के पीछे विचाराधीन बंंदी की दुस्साहसिक ढंग से गोली मार कर हत्या कोई मामूली वारदात नहीं है। कानून-व्यवस्था को लेकर पहले से हमलावर विपक्ष ने इस मुद्दे को लपक लिया। आलोचनाओं का जबाव देते हुए सीएम योगी को सामने आना पड़ा और उन्होंने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिये। मुख्यमंत्री के आदेश पर शुरू हुई मजिस्ट्रेटी जांच की हालत नौ दिन चले अढाई कोस सरीखी है। इसे सुनील राठी का खौफ माने या दूसरी वजह लेकिन पिछले पांच दिनों से की जा रही साार्वजनिक अपील के बावजूद कोई शख्स जांच करने वाले मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराना तो दूर किसी तरह की जानकारी साझा करने के लिए भी नहीं पहुंचा है। यह दशा तब है जब राठी को सैकड़ों किलोमीटर दूर फतेहगढ़ की सेन्ट्रल जेल भेजा जा चुका है।

पुलिस का रवैया भी जस का तस

बड़ी वारदात के बाद भले सुनील राठी ने सामने आकर इसकी जिम्मेदारी ली हो लेकिन इससे जुड़े लोगों की पहचान के लिए पुलिस ने एडी चोटी का जोर लगा दिया है। रोोज कोई न कोई कड़ी तलाश की जा रही है। पुलिस भले ही अपने काम में तो जुटी है लेकिन मजिस्ट्रेटी जांच को लेकर उनका रवैया भी संतोषजनक नहीं है। मजिस्ट्रेटी जांच की शुरूआत की खातिर मामले को लेकर दर्ज करायी गयी प्राथमिकी से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक जांच अधिकारी को नहीं दी है। जांच अधिकारी एसडीएम बागपत ने इसे लेकर पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजा है।

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